नई दिल्ली : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में छह महीने और राष्ट्रपति शासन बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। शुक्रवार को लोकसभा में अपने पहले संबोधन में उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में क्षेत्रीय संतुलन बड़ा मुद्दा है, जिसे सुलझाना आवश्यक है।

कांग्रेस ने अमित शाह के इस प्रस्ताव का विरोध किया है। कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में 2015 से 2018 के बीच हालात बहुत बिगड़ गए हैं। इसके लिए भाजपा-पीडीपी गठबंधन की सरकार जिम्मेदार है। चुनी हुई सरकार का न होना राज्य के हित के लिए सही नहीं है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार को सुरक्षा बलों से कहा कि आतंकवाद और आतंकियों के प्रति जीरो टॉलरेंस (कोई सहिष्णुता नहीं) की नीति होनी चाहिए।

अमित शाह के दो दिवसीय जम्मू-कश्मीर दौरे के संबंध में मीडिया को जानकारी देते हुए गृह मंत्रालय में विशेष सचिव ए. पी. महेश्वरी और प्रदेश के मुख्य सचिव बी. वी. आर. सुब्रह्मण्यम ने बताया कि गृहमंत्री ने निर्देश दिया है कि आतंकियों की फंडिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहनी चाहिए। गृहमंत्री चाहते हैं कि कानून-व्यवस्था हर कीमत पर लागू होनी चाहिए।

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महेश्वरी ने मीडिया को बताया, "गृहमंत्री ने आतंकवाद और आक्रामकता को काबू करने की दिशा में जम्मू-कश्मीर पुलिस के कार्यो की सराहना करते हुए निर्देश दिया है कि प्रदेश सरकार को पुलिसकर्मियों की शहादत को याद को करने के लिए हर साल उनके गृह शहरों व गावों में कार्यक्रम करना चाहिए।"

उन्होंने कहा, "पुलिसकर्मियों के नाम पर प्रमुख स्थानों का नाम रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह समय-समय पर कई मोर्चो पर प्रदेश के प्रदर्शन की समीक्षा करेंगे।" उन्होंने कहा कि गृहमंत्री ने फिर दोहराया है कि सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह चौकस रहनी चाहिए और हिंसा मुक्त अमरनाथ यात्रा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा संबंधी सारे कदम उठाने चाहिए।