नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद कांग्रेस ने महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सभी जिला कमेटियों को भंग कर दिया है तथा चुनाव के दौरान अनुशासनहीनता की जांच की जिम्मेदारी तीन सदस्यीय समिति को सौंपेगी।

पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया की अनुशंसाओं को स्वीकार कर लिया है, जिनमें कई कदमों का प्रस्ताव किया गया है।

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी बयान के मुताबिक दोनों प्रभारियों की अनुशंसा के मुताबिक सभी जिला कांग्रेस कमेटियों को भंग कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा उपचुनाव की तैयारियों और चुनावी प्रबंधन के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की जाएगी। पार्टी तीन सदस्यीय अनुशासनात्मक समिति गठित करेगी जो लोकसभा चुनाव के दौरान घोर अनुशासनहीनता की जांच करेगी।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस विधायक दल के नेता अजय कुमार लल्लू को पूर्वी उत्तर प्रदेश में संगठन में बदलाव करने के लिए प्रभारी बनाया गया है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन में बदलाव के लिए प्रभारी की नियुक्ति सिंधिया द्वारा की जाएगी। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन किया है। वह सिर्फ रायबरेली सीट ही जीत पाई। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी अमेठी से चुनाव हार गए।

राहुल गांधी की समीक्षा बैठक

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी लोकसभा चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन की समीक्षा के लिए पार्टी के राज्य प्रभारियों के साथ बैठकें कर रहे हैं। कांग्रेस के शीर्ष सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने पार्टी के छत्तीसगढ़ प्रभारी पी.एल.पुनिया से चर्चा करने के कुछ दिनों बाद शुक्रवार को राज्य के वरिष्ठ नेता टी.एस. सिंह देव से चर्चा की। वह आज शाम को पुनिया से फिर मुलाकात करेंगे।

यह भी पढ़ें :

खत्म हुआ बुआ-भतीजे का गठबंधन, मायावती ने किया बड़ा ऐलान

कांग्रेस नेता बोले- आप सोनिया-राहुल को चोर बताकर सत्ता में आए, फिर वे संसद में कैसे बैठे हैं?

कांग्रेस अध्यक्ष महाराष्ट्र के प्रभारी मल्लिकार्जुन खड़गे से बुधवार को और दिल्ली के प्रभारी पी.सी.चाको से शुक्रवार को मिलेंगे। कांग्रेस छत्तीसगढ़ की 11 संसदीय सीटों में से सिर्फ दो पर जीत हासिल कर सकी है। महाराष्ट्र में कांग्रेस 48 लोकसभा सीटों में से सिर्फ एक सीट जीतने में कामयाब रही है। पार्टी राष्ट्रीय राजधानी की सात संसदीय सीटों में सभी हार गई।