नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस के अंदर उठापटक का दौर जारी है। इस बीच कांग्रेस की कर्नाटक प्रदेश इकाई को भंग होने के एक दिन बाद पार्टी सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि कुछ और प्रदेशों की इकाइयों में बदलाव किया जा सकता है। लोकसभा चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद यह कार्रवाई की जा रही है।

पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों ने बताया कि आने वाले दिनों में कुछ और कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने इस बात का संकेत दिया कि आम चुनाव में खराब प्रदर्शन को लेकर बिहार और उत्तर प्रदेश की इकायों को भी भंग किया जा सकता है।

यूपी और बिहार कांग्रेस अध्यक्ष भेज चुके हैं इस्तीफा

बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मदन मोहन झा और प्रदेश प्रभारी शक्ति सिंह गोहिल ने पहले ही पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी को अपना इस्तीफा भेज दिया है। वहीं उत्तर प्रदेश कांग्रेस इकाई के प्रमुख राज बब्बर ने भी लोकसभा चुनाव हारने के बाद अपना इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष को भेज दिया है।

52 सीटों पर सिमटी कांग्रेस

कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में 542 सीटों में से महज 52 सीटों पर जीत दर्ज की। पार्टी को बिहार और उत्तर प्रदेश में एक-एक सीटें प्राप्त हुईं, जबकि दोनों प्रदेशों से क्रमश: 40 और 80 सदस्य लोकसभा के लिए चुने जाते हैं।

प्रियंका ने दिया था कार्रवाई का संकेत

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने अपनी मां और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के साथ 13 जून को अपने राय बरेली के दौरे के दौरान इस बात का संकेत दिया था कि चुनाव में समर्पणन से काम नहीं करने को लेकर पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

यूपी से केवल सोनिया को हासिल हुई जीत

प्रदेश में सोनिया गांधी अपने निर्वाचन क्षेत्र रायबरेली से चुनाव जीतने में कामयाब रहीं, लेकिन राहुल गांधी अमेठी से चुनाव हार गए। उनको केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने 55,000 मतों से शिकस्त दी।

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इन तीन राज्यों में होगी कार्रवाई

कांग्रेस ने कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी का भंग कर दिया है, हालांकि प्रदेश प्रमुख दिनेश गुंडू राव और कार्यकारी अध्यक्ष ईश्वर बी. खांद्रे को बरकरार रखा गया है।

सूत्रों ने बताया कि कार्रवाई मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में की की जाएगी जहां सत्ता में रहने के बावजूद पार्टी का प्रदर्शन खराब रही है।

महासचिव से लेकर प्रदेश प्रभारियों को भी बदलने पर विचार

पार्टी नेतृत्व द्वारा कई महासचिवों, सचिवों और प्रदेश प्रभारियों को भी बदलने पर विचार किया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि केरल, पंजाब और तमिलनाडु में अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, क्योंकि वहां पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहा है।