कुछ ऐसा है ओम बिरला का छात्र नेता से लोकसभा अध्यक्ष बनने तक का सफर

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नई दिल्ली : भाजपा सांसद ओम बिरला लोकसभा के अध्यक्ष चुने गए हैं। आज उन्होंने अपना पदभार संभाल लिया है। ओम बिरला को लोकसभा का अध्यक्ष बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने फैसले से एक बार फिर सब को चौंका दिया है। आइए जानते हैं ओम बिरला के छात्र राजनीति से लोकसभा अध्यक्ष तक का सफर..

मोदी-शाह के करीबी हैं बिरला

अब तक वरिष्ठ सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष का पद संभालने की परंपरा रही है और भाजपा सांसद ओम बिरला इस मामले में अपेक्षाकृत कम अनुभवी माने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद लोकसभा स्पीकर पद के लिए ओम बिरला के नाम का प्रस्ताव रखा था। ओम बिरला को मोदी और भाजपा अध्यक्ष एवं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का करीबी माना जाता है।

पीएम मोदी एवं ओम बिरला (फाइल फोटो)

राजनीतिक गुणा-भाग के हिसाब से देखें तो राजस्थान की कोटा-बूंदी सीट से दूसरी बार सांसद चुने गए बिरला का 17वीं लोकसभा का अध्यक्ष बनना बेहद खास है। बिरला राजस्थान के हाड़ौती अंचल से देश के एक प्रमुख संवैधानिक पद पर विराजने वाले पहले नेता हैं।

छात्र राजनीति से लोकसभा अध्यक्ष तक का सफर

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, ओम बिरला छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े हैं। इसके बाद वह भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) से जुड़े रहे और जिला एवं राज्य स्तर पर इसकी अगुवाई की। बिरला ने 2003 में राजस्थान विधानसभा चुनावों में कोटा दक्षिण सीट पर कांग्रेस के दिग्गज शांति धारीवाल को हराकर सक्रिय राजनीति में कदम रखा। वह लगातार तीन बार विधायक रहे। इस दौरान भाजपा में बिरला का कद लगातार मजबूत हुआ।

ओम बिरला का स्वागत करते समर्थक (फाइल फोटो)

साल 2014 के आम चुनाव में पार्टी ने उन्हें कोटा सीट से लोकसभा प्रत्याशी बनाया और उन्होंने जीत दर्ज की। साल 2019 के आम चुनाव में बिरला ने कांग्रेस के रामनारायण मीणा को 2,79,677 मतों से हराया।

पू्र्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के साथ ओम बिरला (फाइल फोटो)

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ऐसा पहली बार नहीं हुआ है

लोकसभा अध्यक्ष के तौर पर ओम बिरला ने आठ बार सांसद रह चुकीं सुमित्रा महाजन की जगह ली। हालांकि, ऐसा नहीं है कि पहले अपेक्षाकृत किसी कम अनुभवी सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष का पद नहीं संभाला हो। साल 1996 में तेलुगु देशम पार्टी के नेता जीएमसी बालयोगी भी जब लोकसभा अध्यक्ष बने थे तो वह दूसरी बार ही सांसद चुने गए थे।

साल 2002 में बालयोगी के निधन के बाद शिवसेना नेता और पहली बार सांसद चुने गए मनोहर जोशी को लोकसभा अध्यक्ष बनाया गया था। बिरला ऊर्जा पर संसद की स्थायी समिति के सदस्य हैं। वह सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की याचिका समिति एवं परामर्श समिति के भी सदस्य हैं।

परिवार के बीच ओम बिरला 

ओम बिरला व्यक्तिगत जीवन

ओम बिरला का जन्म 23 नवंबर 1962 को हुआ। उनके पिता श्रीकृष्ण बिरला सरकारी सेवा में थे जबकि मां शकुंतला गृहिणी थीं। 57 वर्षीय बिरला के लिए कोटा जन्मभूमि व कर्मभूमि दोनों रही है। उन्होंने स्कूली शिक्षा कोटा के गुमानपुरा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय से की और उसके बाद बाद राजस्थान विश्वविद्यालय से बी.कॉम व एम.कॉम किया। उनकी शादी अमिता से हुई और उनके दो बेटियां अंजली, आकांक्षा हैं। अमिता पेशे से चिकित्सक हैं।

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