नई दिल्ली। केंद्र मे मोदी सरकार की दोबारा हुई वापसी के बाद से ही भ्रष्ट अधिकारियों कों बाहर का रास्ता दिखाने का काम शुरू हो चुका है। करीब 15 केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने अपने विभाग के 15 अधिकारियों को जबरन रिटायरमेंट पर भेज दिया है। सरकार ने रूल 56 का इस्तेमाल करते हुए इन्हें तत्काल हटाने का फैसला किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मुताबिक 15 अधिकारियों में एक प्रधान आयुक्त अनूप श्रीवास्तव भी शामिल है। अनूप पर भ्रष्टाचार और रिश्वत लेने के आरोप हैं। अनूप श्रीवास्तव जिले में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड में प्रिंसिपल है ए डी जी के पद पर कार्यरत हैं। उनके अलावा बर्खास्त किए गए अधिकारियों में जॉइंट कमिश्नर नलिन कुमार भी शामिल है।

सीबीआई ने इन पर 1996 में अपराधिक मुकदमा दर्ज किया था। वित्त मंत्रालय के द्वारा जारी आदेश के अनुसार केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड के अधिकारियों को प्रधान आयुक्त और सहायक आयुक्त के पद से हटा दिया गया है इनमें से कई अफसर पहले से ही निलंबन पर चल रहे थे।जबरन रिटायर किए गए अधिकारियों पर सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया था।

ये हैं वो अधिकारी जिन पर दर्ज है आरोप

रिश्वतखोरी के आरोप में कोलकाता में कमिश्नर संसार चंद का भी नाम शामिल है। वहीं चेन्नई के कमिश्नर जी श्री हर्षा पर 2.24 करोड़ रुपये के आय से अधिक संपति का मामला है, उन्हें भी बर्खास्त कर दिया गया। दो आयुक्त रैंक के अधिकारी अतुल दीक्षित और विनय बृज सिंह, पहले से निलंबन पर चल रहे थे। उन्हें भी सरकार ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है।

सीबीआई से बर्खास्त अफसरों में अतिरिक्त आयुक्त अशोक महिदा(डीजी सिस्टम कोलकाता), अतिरिक्त आयुक्त वीरेंद्र अग्रवाल शामिल हैं।

इन अधिकारियों के दिया जबरन रिटायरमेंट

बाकी 15 रिटायर किए अधिकारियों में सहायक आयुक्त एसएस पबाना(निलंबित),एसएस बिष्ट(भुवनेश्वर जीएसटी ज़ोन), विनोद संगा (मुंबई जीएसटी ज़ोन), राजू सेकर (विजाग जीएसटी ज़ोन), मोहम्मद अल्ताफ़ (इलाहाबाद में) और उपायुक्त अशोक असवाल (लॉजिस्टिक्स निदेशालय, दिल्ली हैं। इन सभी को जबरन रिटायर कर दिया गया है।