नई दिल्ली : कहा जा रहा है कि राहुल गांधी के जिद के आगे कांग्रेस नेता झुकने को तैयार हो गए हैं। कांग्रेस नेताओं ने राहुल की बात मानते हुए एक बीच का रास्ता निकाला है, जिसमें राहुल गांधी की बात भी रह जाए और कांग्रेस का अध्यक्ष पद भी खाली न रहे। इसके लिए यह तैयारी की जा रही है।

लोकसभा चुनाव 2019 में मिली हार के बाद राहुल गांधी ने 25 मई को बुलाई गई कांग्रेस कार्यसमिति के सामने हार की जिम्मेदारी लेते हुए कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश कर दी थी। इसके बाद बैठक में ही CWC के सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से राहुल गांधी के इस्तीफे को नामंज़ूर कर दिया था। इन सबके बाद भी राहुल अपने फैसले पर कायम रहे, साथ ही राहुल ने नया अध्यक्ष चुनने के लिए पार्टी के बड़े नेताओं को अगले एक महीने का समय दिया है।

पार्टी के सूत्रों का कहना है कि इस्तीफे की पेशकश के बाद से ही राहुल गांधी को मनाने की हर कोशिश नाकाम रही है। कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने राहुल को सलाह दी कि वो संकट की इस घड़ी में पार्टी का नेतृत्व करते रहें। इस बीच राहुल लगातार नेताओं को कहते रहे कि वो अगले अध्यक्ष को चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दें।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ ही राहुल ने ये भी संकेत दिया कि वो पार्टी अध्यक्ष रहे बगैर भी पार्टी के लिए काम करते रहेंगे। इस दौरान वह पार्टी के लोगों से मेलजोल बढ़ाएंगे और जनाधार बढ़ाते हुए पार्टी को सत्ता में लाने के लिए अभियान चलाएंगे।

ये हैं दावेदार

पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि गांधी परिवार के करीबी दो बड़े नेता अहमद पटेल और गुलाम नबी आज़ाद को नए अध्यक्ष को तलाशने की जिम्मेदारी दी गई है, इन दो नेताओं ने इसको लेकर दक्षिण भारत के कुछ बड़े नेताओं से संपर्क साधा, लेकिन कहा ये जा रहा है कि कोई भी नेता राहुल के रहते हुए अध्यक्ष बनने को तैयार नहीं हो रहा है। ऐसे में उत्तर भारत के किसी बड़े कद्दावर नेता को पार्टी की कमान दी जा सकती है।

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कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, सुशील कुमार शिन्दे, मीरा कुमार, अशोक गहलोत सहित कुछ नेताओं के नाम पर विचार किया जा रहा है और इनमें से किसी एक को जिम्मेदारी दी जा सकती है।

यह है राहुल का अगला प्लान

राहुल गांधी देशभर में घूमकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं से मिलकर संवाद करने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए वह बिना पद के मोदी सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ खुल कर आलोचना करेंगे व जनता से सीधे जुड़ने का काम करेंगे। पद नहीं रहने पर सत्ता पक्ष के निशाने पर कांग्रेस अध्यक्ष होंगे न कि राहुल गांधी। इस प्रयोग के साथ राहुल गांधी उन राज्यों के ज्यादा समय दे सकेंगे जहां कांग्रेस जमीन पर खत्म हो चुकी है और दोबारा वहां पर कांग्रेस के जीवित होने की उम्मीद है।