हैदराबाद : लोकसभा चुनाव 2019 की मतगणना जारी हैं। शुरुआती रुझानों में भाजपा को प्रचंड बहुमत मिलती दिख रही है। रुझानों में एनडीए को 340 से ज्यादा सीटें मिलती नजर आ रही हैं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस का हालत चिंताजनक है। कांग्रेस 55 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। आखिर कांग्रेस के इतना खराब प्रदर्शन के क्या कारण है।

कांग्रेस के तरकश के प्रियंका गांधी वाड्रा और 'चौकीदार चोर है' जैसे तीर भी पूरी तरह नाकाम रहे। कांग्रेस तीन राज्यों में सरकार तो बना ली और सोचने लगी कि वह केन्द्र से भी अपने दम पर भाजपा को उखाड़ फेंकेगी। यही कांग्रेस का अति-आत्मविश्वास उसे ले डूबा है।

आइए जानते हैं लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के प्रमुख बड़े कारण

तुरुप का इक्का ही नाकाम

कांग्रेस ने इस चुनाव से ठीक पहले प्रियंका गांधी को महासचिव नियुक्त कर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी थी। उन्हें लोकसभा चुनाव के लिए तुरुप का इक्का माना जा रहा था। देश के कई राज्यों में उनके रोड शो हुए। उनकी चुनावी रैलियों में भारी भीड़ भी दिखाई दी, लेकिन वह भीड़ वोट में तब्दील नहीं हो सकी। इस तरह कांग्रेस का बड़ा दांव विफल हो गया।

कांग्रेस का नकारात्मक प्रचार

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। राहुल ने राफेल पर उन्हें घेरने के लिए 'चौकीदार चोर है' का नारा दिया। लोगों को उनकी यह बात रास नहीं आई और उनका यह दांव उल्टा पड़ गया। अगर कांग्रेस अध्यक्ष नकारात्मक प्रचार नहीं करते तो हो सकता है कि कांग्रेस को कुछ सीटों का फायदा हो सकता था।

कांग्रेस के पास मुद्दों का अभाव

इस लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार के खिलाफ कांग्रेस के पास कोई मुद्दा ही नहीं था। राहुल ने राफेल को मुद्दा बनाया लेकिन बालाकोट सर्जिकल के बाद यह मुद्दा फेल हो गया। गरीबों को पैसे खाते में डालने का फंडा भी जनता ने नकार दिया। कांग्रेस महंगाई और भ्रष्टाचार के मामले को चुनावी मुद्दा बनाकर भुनाने में नाकामयाब रही।

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भाजपा ने पांच साल काफी काम किया था, लोगों के लिए आयुष्‍मान भारत योजना, स्मार्ट सिटी समेत कई योजनाएं लाई गई थीं। किसानों के खाते में भी पैसे आए इसलिए राहुल का 'अब होगा न्याय' भी लोगों की समझ में नहीं आया।

यूपी -एमपी व राजस्थान में अलग चुनाव लड़ना :

इस चुनाव में सपा और बसपा तो साथ मिलकर चुनाव लड़े, लेकिन कांग्रेस ने यहां कुछ सीटों को छोड़कर सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए। बहरहाल वोटों का बंटवारा हुआ और कांग्रेस को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ा। मध्य प्रदेश व राजस्थान में यदि बसपा के साथ होते तो कुछ सीटों का फायदा हो सकता था।

राज्य सरकारों के वायदे पर खरा म उतरना

मध्य प्रदेश राजस्थान और छत्तीसगढ़ में किसानों के कर्जमाफी की बात पर खरे नहीं उतरने से इन राज्यों में करारा झटका लगा है। लोगों को कहना कि 10 दिन में कर्जामाफी की बात कह सरकार बनाने वाली कांग्रेस ने पांच महीनों में कुछ खास नहीं पर पाई।

नरेंद्र मोदी सब पर भारी

इस लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी ही सबसे बड़ा चेहरा थे, वही सबसे बड़ा मुद्दा भी थे और यह चुनाव उनके ही नाम पर लड़ा गया। मोदी विपक्ष के सभी नेताओं पर भारी पड़ गए। उनके सामने किसी की एक नहीं चली। जनता जर्नादन को उनके खिलाफ कहा गया एक भी शब्द रास नहीं आया और तमाम मोदी विरोधी पस्त हो गए।

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल ने कहा कि 'कांग्रेस नहीं...बेरोज़गारी हारी हैं, शिक्षा हारी हैं, किसान हारा हैं, महिला का सम्मान हारा हैं, आम जनता से जुड़ा हर मुद्दा हारा हैं, एक उम्मीद हारी हैं, सच कहे तो हिंदुस्तान की जनता हारी हैं।कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता की लड़ाई को सलाम करता हूँ।लड़ेंगे और जीतेंगे।जय हिंद'।