नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जीत की बधाई दी है। साथ ही उन्होंने अमेठी से अपनी हार मान ली है और भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी को जीत की बधाई भी दे दी है। उन्होंने कहा, "अमेठी में स्मृति ईरानी जीत गई हैं। मैं चाहता हूं कि प्यार से अमेठी की जनता की देखभाल करें।"

17वीं लोकसभा चुनाव के तहत उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट पर सभी की निगाहें थी। इस सीट पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चुनाव लड़ रहे हैं, जिनका मुकाबला भाजपा की स्मृति ईरानी से था।

स्मृति ईरानी 265792 मतों के साथ आगे चल रही हैं वहीं राहुल गांधी 237749 वोटों के साथ पीछे चल रहे हैं। 49.01 फीसदी मतों के साथ स्मृति ईरानी आगे चल रही हैं जबकि 43.98 प्रतिशत मत के साथ राहुल गांधी दूसरे स्थान पर हैं।

2014 का चुनाव :

2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी सीट पर 52.38 फीसदी वोटिंग हुई थी, जिसमें कांग्रेस के राहुल गांधी 46.71 फीसदी (4,08,651) वोट मिले थे और और उनके निकटतम बीजेपी प्रत्याशी स्मृति ईरानी को 34.38 फीसदी (3,00,748) मिले थे। इसके अलावा बसपा के धर्मेंद्र प्रताप सिंह को महज 6.60 फीसदी (57,716) वोट मिले थे। इस सीट पर कांग्रेस के राहुल गांधी ने 1,07,903 मतों से जीत दर्ज की थी।

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अमेठी का इतिहास :

अमेठी लोकसभा सीट 1967 में परिसीमन के बाद वजूद में आई। अमेठी से पहली बार कांग्रेस के विद्याधर वाजपेयी सासंद बने। इसके 1971 में भी उन्होंने जीत हासिल की, लेकिन 1977 में कांग्रेस ने संजय सिंह को प्रत्याशी बनाया, लेकिन वह जीत नहीं सके। इसके बाद 1980 में इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी चुनावी मैदान में उतरे और इस तरह से इस सीट को गांधी परिवार की सीट में तब्दील कर दिया। हालांकि 1980 में ही उनका विमान दुर्घटना में निधन हो गया।

इसके बाद 1981 में हुए उपचुनाव में इंदिरा गांधी के बड़े बेटे राजीव गांधी अमेठी से सांसद चुने गए। साल 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए चुनाव में राजीव गांधी एक बार फिर उतरे तो उनके सामने संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी निर्दलीय चुनाव लड़ीं, लेकिन उन्हें महज 50 हजार ही वोट मिल सके। जबकि राजीव गांधी 3 लाख वोटों से जीते। इसके बाद राजीव गांधी ने 1989 और 1991 में चुनाव जीते। लेकिन 1991 के नतीजे आने से पहले उनकी हत्या कर दी गई, जिसके बाद कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा चुनाव लड़े और जीतकर लोकसभा पहुंचे।

1996 में शर्मा ने जीत हासिल की, लेकिन 1998 में भाजपा के संजय सिंह हाथों हार गए। सोनिया गांधी ने राजनीति में कदम रखा तो उन्होंने 1999 में अमेठी को अपनी कर्मभूमि बनाया। वह इस सीट से जीतकर पहली बार सांसद चुनी गईं, लेकिन 2004 के चुनाव में उन्होंने अपने बेटे राहुल गांधी के लिए ये सीट छोड़ दी। इसके बाद से राहुल ने लगातार तीन बार यहां से जीत हासिल की।