अमरावती : आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नारा चंद्रबाबू नायडू को अपनी इन पांच गलतियों की वजह से कड़ी हार का सामना करना पड़ रहा है। चंद्रबाबू के तुगलकी रवैये का आंध्र प्रदेश के लोगों ने ईवीएम के माध्यम से सबक सिखाया है। टीडीपी नेताओं को महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार भी उनके लिए महंगा पड़ा। इन सब बातों के अलावा जानिए चंद्रबाबू नायडू की हार के 5 मुख्य कारण हैं।

पहला कारण- भारतीय संविधान व लोकतंत्र की चंद्रबाबू द्वारा की गई अवहेलना

चंद्रबाबू ने भारतीय संविधान को सर्वोपरी मानने व लोकतंत्र की गरीमा को नजरअंदाज किया। लोकतंत्र के अंग रहे विभागों का उन्होंने स्वार्थ की राजनीति के लिए दुरुपयोग किया। उन्होंने ईवीएम मशीनों की कार्यप्रणाली पर संदेह व्यक्त किया। कई मतदान केंद्रों पर टीडीपी के नेताओं ने मतदाताओं को वोट करने से रोका। चुनाव अधिकारी ने इसेस जुड़े सबूत उन्हें दिखाये।

दूसरा कारण - बिना प्रतिपक्ष आंध्र प्रदेश में विधानसभा की कार्यवाही चलाई

चंद्रबाबू के किसी भी निर्णय का विधानसभा में विरोध नहीं किया गया। सारे निर्णय एकतरफा लिये गये। बजट सत्र भी आंध्र प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष YS जगन मोहन रेड्डी की उपस्थिति के बगैर चला। प्रदेश के विकास व लोगों के कल्याण से जुड़े मामलों पर अपने स्वार्थ को प्राथमिकता देते हुए टीडीपी ने निर्णय लिया।

तीसरा कारण - दलबदलू नीति

तीसरा कारण जो काफी चर्चा में रहा वह है दलबदलू नीति। चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में अपनी ही नीति अमल में लाने के उद्देश्य से YSR कांग्रेस पार्टी के विधायकों की खरीद-फरोख्त की। उन्हें मंत्री पद का लालच देकर टीडीपी में शामिल कर लिया। इन विधायकों को लोगों ने YSRCP की विचारधारा पर मत दिया था, लेकिन वाईएसआरसीपी के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद विधायकों ने लोगों के निर्णय पर पानी फेरते हुए टीडीपी का दामन थामा। इससे लोगों में उन विधायकों के प्रति आक्रोश उमड़ा, जिन्होंने YSRCP के टिकट पर चुनाव जीता था।

चौथा कारण- वोट के बदले नोट का मामला

इस मामले ने राजनीति क्षेत्र में हलचल मचा दी। चंद्रबाबू नायडू ने विधायकों की खरीद-फरोख्त के साथ लोगों के मताधिकार को भी खरीदने का प्रयास किया। उन्हें विभिन्न प्रलोभन देकर अपने पक्ष मत डालने पर मजबूर करने का भी प्रयास किया। साथ ही उन्होंने 600 आश्वासन देकर किसी एक आश्वासन को पूरा नहीं किया। लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया। लोगों के साथ धोखाधड़ी की।

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पांचवा कारण - भ्रष्टाचार

प्रदेश के विकास व लोगों के कल्याण को लेकर जिन योजनाओं को पिछली सरकार ने अमल में लाया था, उन योजनाओं को स्थगित कर अपनी स्वार्थपरक योजना को अमल में लाया। इन योजनाओं की अमलावरी में टीडीपी नेताओं ने दबंगाई का आइना भी दिखा दिया।

भारत की आर्थिक नीति जिन योजनाओं पर आधारित होती है, उन योजनाओं को धूमिल कर दिया। इन योजनाओं में पोलावरम योजना का कार्य केवल कुछ ही प्रतिशत शेष था, लेकिन इसे पूरा करने में चंद्रबाबू ने स्वार्थ की राजनीति की। केंद्र को भी गुमराह किया। केंद्र द्वारा जारी योजनाओं की राशि का दुरुपयोग किया। इस राशि के मामले में उन्होंने भ्रष्टाचार की हदें पार करने का प्रयास किया। चंद्रबाबू की धांधलियों पर काग ने भी रपट पेश की।