नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजों का सब बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। एक्जिट पोल के नतीजों की बात करें तो बीजेपी के उम्मीदवार सबसे अधिक जीत हासिल करेंगे। इलेक्शन वॉच और एडीआर की पहले की रिपोर्टे के मुताबिक बीजेपी ने लोकसभा चुनाव 2019 में सबसे अधिक दागी उम्मीदवार उतारे हैं। जाहिर है अगर बीजेपी के कैंडिडेट सर्वाधिक सफल होते हैं तो इस बार 17वीं लोकसभा में दागी सांसदों की संख्या अधिक होगी।

रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी के पांच में से कम से कम एक उम्मीदवार पर गंभीर आपारधिक मामले दर्ज हैं। मतलब बीजेपी के चालीस फीसदी उम्मीदवारों पर संगीन आरोप हैं, जिनमें खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं।

इससे एक कदम ही पीछे कांग्रेस पार्टी के कुल उम्मीदवारों में 39 फीसदी कैंडिडेट दागी हैं। मतलब ये कि जीत हासिल करने के लिए देश की दोनों ही राष्ट्रीय पार्टियों ने दागी और आपराधिक छवि वाले नेताओं पर भरोसा जताया है।

दागी तेदेपा नेताओं का कच्चा चिट्ठा, आंध्र चुनाव में वोटर करेंगे इनसे तौबा

छोटी पार्टियों की बात करें तो स्थिति अधिक भयावह नजर आती हैं। माकपा ने अपने कुल उम्मीदवारों में 58 फीसदी दागियों को उतारा है। मतलब ये कि छोटी पार्टियां जीत के लिए इस हथकंडे को अपनाने में परहेज नहीं कर रही है। जानकारों की मानें तो ज्यादातर पार्टियां कैंडिडेट चुनते वक्त उनकी छवि से अधिक उनकी जीत की संभावना पर ही विचार करती है।

आपराधिक छवि के मामले कौन उम्मीदवार अव्वल?

बीजेपी के उम्मीदवार के. सुरेंद्र पर सबसे अधिक 240 मामले हैं। इनमें दंगा सहित हत्या के प्रयास जैसे संगीन मामले हैं, जो फिलहाल लंबित है। माना जाता है कि इस बार के चुनाव में सुरेंद्र ही सबसे आला दर्जे के दागी कैंडिडेट हैं। के सुरेंद्र मूल रूप से केरल के सबरीमाला के रहने वाले हैं। उन पर ज्यादातर मामले सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को रोकने से संबंधित है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर से पाबंदी हटा दी है। बावजूद इसके बीजेपी और कुछ स्थानीय दल जबरन महिलाओं को मंदिर में प्रवेश से रोकते रहे। इसी सिलसिले में नेताओं पर कई मामले भी दर्ज हुए हैं।

के सुरेंद्र अपनी छवि को लेकर बताते हैं, "बाहरी लोगों को लगता होगा कि मैं बड़ा अपराधी हूं। जबकि ऐसा नहीं है, मैं पूरी तरह निर्दोष हूं। ये सब मामले राजनीति से प्रेरित हैं।"

दूसरे नंबर की बात करें कांग्रेस पार्टी के डीन कुरियाकोस 204 आपराधिक मामलों के साथ दूसरे नंबर पर हैं। हालांकि इनमें ज्यादातर मामले राजनीतिक धरना प्रदर्शन से जुड़ी हुई है। कुरियाकोस भी केरल के ही रहने वाले हैं। हालांकि कुरियाकोस अपनी आपराधिक छवि को लेकर मीडिया में प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं।

समाजशास्त्रियों की माने तो स्थानीय स्तर पर बाहुबली समानांतर सत्ता चलाते हैं। अगर सरकारी मशीनरी किसी व्यक्ति के साथ न्याय नहीं कर पाती है, तो ये बाहुबली जोर जबरदस्ती से पीड़ित को उनका हक दिलाते हैं। इसी से ये जनता के हीरो भी बनते हैं और वोट पाते हैं।

एडीआर की रिपोर्ट में करीब ढाई लाख मतदाताओं के बीच सर्वे में 98 फीसदी ने माना कि आपराधिक छवि वाले नेताओं को जिताना सही नहीं है। जबकि इसी सर्वे में करीब 35 फीसदी मतदाताओं ने जाति के नाम पर आरोपियों को वोट करने से परहेज नहीं करने की बात कही।

सियासी मैदान में आपराधिक पृष्ठभूमि के नेताओं की फेहरिस्त लंबी है, लिहाजा इसकी पूरी गुंजाइश है कि इस बार भी बड़ी संख्या में दागी नेता लोकतंत्र के मंदिर में पहुंचेंगे। एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक पहले चरण के चुनाव में 17 फीसदी दागी उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें 12 फीसदी के खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं।

एडीआर की रिपोर्ट में दागी उम्मीदवारों की लिस्ट में बिहार सबसे अव्वल है। इसके बाद नंबर आता है पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और लक्षद्वीप का। आश्चर्यजनक रूप से सबसे अधिक हिंसाग्रस्त जम्मू कश्मीर में सबसे कम आपराधिक छवि वाले कैंडिडेट शामिल हैं। यहां महज तीन फीसदी उम्मीदवारों पर ही आपराधिक मामले दर्ज हैँ।

2014 चुनाव के मुकाबले इस बार दागियों की तादाद अधिक

पिछले लोकसभा चुनाव 2014 के मुकाबले इस बार 2019 के चुनाव में दागी उम्मीदवारों की तादात में 4 फीसदी का इजाफा हुआ है। 2014 लोकसभा चुनाव में जहां कुल दागियों का प्रतिशत 19 था, वहीं इस बार इसका आंकड़ा 23 प्रतिशत के करीब है। मतलब ये कि दिनोंदिन राजनीति के अपराधीकरण की प्रक्रिया तेज ही होती जा रही है।