बहन मीसा के लिए दूरी खत्म कर नजदीक आए तेजप्रताप और तेजस्वी

तेजस्वी  यादव और तेज प्रताप के बीच नजदीकियां बढ़ गई है। - Sakshi Samachar

पटना। ‘अपना खून तो अपना ही होता है।'' यह बात लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में बिहार में भी सच साबित प्रतीत होती है क्योंकि आपस में झगड़ रहे लालू प्रसाद के बेटे तेज प्रताप यादव और तेजस्वी यादव अपने झगड़े को भूलकर अपनी सबसे बड़ी बहन मीसा भारती की जीत के लिए मिलकर मैदान में उतर गए हैं। लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप ने हाल में राजद की छात्र इकाई के संरक्षक पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने लोकसभा चुनाव के लिए अपने द्वारा सुझाए गए नामों की अनदेखी किए जाने के बाद यहां तक कि कुछ सीटों पर राजद उम्मीदवारों के खिलाफ प्रचार भी किया।

हालांकि अपनी बहन भारती के प्रति उनकी वफादारी कम नहीं हुई और वह उनके पक्ष में अपनी मां राबड़ी देवी के साथ प्राय: प्रचार करते दिखते हैं। रविवार को यह पहला मौका था जब उन्होंने अपने भाई तेजस्वी के साथ मिलकर बहन के लिए प्रचार किया। भारती पाटलिपुत्र से चुनाव मैदान में हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में वह हार गई थीं। इस सीट पर 2009 में लालू मित्र से प्रतिद्वंद्वी बने रंजन प्रसाद यादव से हार गए थे।

लालू की बेटी भारती केंद्रीय मंत्री एवं मौजूदा सांसद रामकृपाल यादव के खिलाफ मैदान में हैं। रामकृपाल कभी लालू के वफादार होते थे। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हो गए थे। रविवार को निर्वाचन क्षेत्र में एक रैली के दौरान दोनों भाई तेज प्रताप और तेजस्वी साथ खड़े थे और उन्होंने चारा घोटाले से संबंधित मामलों में कैद की सजा काट रहे अपने पिता लालू की एक तस्वीर उठा रखी थी।

तेजप्रताप यादव ने अपने छोटे भाई के लिए भी ‘‘प्यार'' दिखाया और कहा कि वह उन्हें (तेजस्वी) अर्जुन के रूप में देखते हैं तथा खुद उनकी मदद भगवान कृष्ण की तरह कर रहे हैं। तेजप्रताप और उनके परिवार के बीच पहली बार विवाद तब सामने आया था जब उन्होंने अपनी पत्नी के खिलाफ तलाक की अर्जी दाखिल की थी।

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विवाद तब और गहरा गया था जब उनके ससुर एवं पूर्व मंत्री चंद्रिका राय को सारण से राजद प्रत्याशी चुना गया। विगत में लालू और राबड़ी देवी दोनों ही सारण से चुनाव लड़ चुके हैं। राजद के एक नेता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि मीसा भारती के समझाने पर दोनों भाई एक साथ आए। भारती ने दोनों को एक साथ बैठाया और कहा कि एक-दूसरे से लड़ने से वे भाजपा नीत राजग के जाल में फंस जाएंगे जो उनकी पार्टी को खत्म करना चाहता है।

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