भोपाल : मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि मालेगांव विस्फोट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भोपाल से भाजपा का उम्मीदवार इसलिए बनाया गया है, क्योंकि पार्टी का मानना है कि वह 'दोषी नहीं' है, बल्कि भगवा आतंक का सिक्का उछालने के बाद कांग्रेस द्वारा उन्हें बलि का बकरा बनाया गया।

समाचार एजेंसी को दिए साक्षात्कार में चौहान ने कहा, "साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को बहुत विचार-विमर्श के बाद पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया है।"

उन्होंने कहा, "2008 में 'भगवा आतंक' का शब्द उछाला गया था। कांग्रेस ने इस शब्द को उछाला था और उन्होंने उन्हें बलि का बकरा बनाया और दिग्विजय सिंह इसके सूत्रधार थे।"

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि 'हिंदू आतंकवाद' को सामने लाने के लिए एक अलग तरह का माहौल बनाया गया।

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उन्होंने कहा, "यह हिंदुत्व को अपमानित करने के लिए साजिश रची गई थी और साध्वी प्रज्ञा को बलि का बकरा बनाया गया। उन्हें प्रताड़ित किया गया और एक महिला होने के बावजूद उन्हें निर्दयता से पीटा गया।"

यह पूछे जाने पर कि पार्टी को उन्हें मालेगांव विस्फोट मामले में बरी किए जाने का इंतजार करना चाहिए था? शिवराज ने कहा, "हमें क्यों उनके बरी होने तक इंतजार करना चाहिए था, जबकि हम मानते हैं कि वह आतंक की आरोपी नहीं हैं।"

उन्होंने कहा, "और साध्वी प्रज्ञा अकेले चुनाव नहीं लड़ रही हैं, बल्कि चुनाव में हमसब उनके साथ लड़ रहे हैं।"

यह पूछे जाने पर कि कांग्रेस द्वारा दिग्विजय सिंह को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद प्रज्ञा को भोपाल से उतारा गया? चौहान ने कहा, "हमने भोपाल से दिग्विजय सिंह के नाम की घोषणा होने के बाद उन्हें चुनाव मैदान में उतारा। यह निर्णय किया गया कि वह दिग्विजय सिंह के खिलाफ सही उम्मीदवार होंगी। यह पार्टी का एक सामूहिक निर्णय था।"

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यह पूछे जाने पर कि भाजपा सरकार ने बीते पांच वर्षो में अगर बहुत विकास कार्य किया है तो, फिर क्यों पार्टी के मुख्य चुनावी मुद्दे के रूप में राष्ट्रवाद को लाया गया? भाजपा नेता ने कहा, "राष्ट्रवाद हमेशा से हमारा मुद्दा रहा है। क्या कोई भी नागरिक पसंद करेगा कि किसी भी सैनिक का पाकिस्तान गला काटे?"

उन्होंने कहा, "राष्ट्रीयता के मुद्दे में कोई खराबी नहीं है।"

कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों पर निशाना साधते हुए तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे चौहान ने कहा, "वे लोग चिंतित हैं, जिन्होंने कभी राष्ट्रवाद का अनुसरण नहीं किया और कभी भी राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता नहीं की।"

उन्होंने कहा, "जिनलोगों ने सिमी को पनाह दी और आतंकवादियों की भाषा में बात करते हैं, उन्हें राष्ट्रवाद के मुद्दे से समस्या है।"

पाकिस्तान में हवाई हमले के बाद सबूत मांगने के लिए कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, "बालाकोट के बाद हर कोई खुश था, लेकिन कांग्रेस ने इसपर सवाल उठाए। वे सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और विंग कमांडर अभिनंदन को सफलतापूर्वक वापस लाने पर निराश दिखे।"

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उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई अंतिम चरण में पहुंच गई है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया है और कश्मीर में बुरहान वानी गैंग का सफाया हो गया है।

उन्होंने कहा, "भाजपा ने हमेशा कहा है कि पार्टी राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कभी समझौता नहीं करेगी। देश में कुछ विघटनकारी ताकतें हैं, उन्हें भी कुचल दिया जाएगा।"

यह पूछे जाने पर कि पार्टी मध्यप्रदेश में कितनी सीटें जीतेगी? भाजपा नेता ने कहा, "हमने 2014 लोकसभा चुनाव में 29 में से 27 सीटें जीती थी और इसबार हमें राज्य में 25 से ज्यादा सीटें जीतने की उम्मीद है।"

राज्य में पार्टी के मजबूत प्रदर्शन की वजह बताते हुए उन्होंने कहा, "बीते चार महीनों में, कमलनाथ सरकार राज्य में भाजपा के लिए वरदान साबित हुई है।"

उन्होंने कहा कि लोगों ने दोनों सरकारों की कार्यशैली के अंतर को देखा है।

शिवराज ने कहा, "भाजपा सरकार के तीन कार्यकाल और चार माह पुरानी कांग्रेस सरकार के कार्य को लोगों ने देखा है।"

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कांग्रेस पर उसके चुनावी वादे को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए, उन्होंने कहा, "उन्होंने राज्य में किसानों के कृषि ऋण को माफ करने का वादा किया था। जाइए और लोगों से पूछिए, वे आपको बताएंगे कि यह नहीं हुआ है।"

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यहां तक कि बेरोजगारी भत्ता देने का वादा भी पूरा नहीं किया गया।

उन्होंने कहा, "उन्होंने लोगों के हित के लिए हमारी सरकार की ओर से चलाई गई योजना जैसे संबल योजना को बंद कर दिया है। लोग उनसे गुस्सा हैं।"

उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार राज्य में 'तबादला उद्योग' चला रही है।

यह पूछे जाने पर कि वह लोकसभा चुनाव क्यों नहीं लड़ रहे हैं, जबकि केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज के चुनाव न लड़ने की घोषणा के बाद वह विदिशा से चुनाव लड़ने के प्रमुख दावेदार थे? उन्होंने कहा, " मेरा मानना है कि तीन कार्यकाल तक मुख्यमंत्री रहने के बाद मुझे किसी कुर्सी की जरूरत नहीं है।"

उन्होंने कहा कि अगर वह राज्य में हार गए तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह किसी अन्य पद के लिए दिल्ली जाएंगे।

उन्होंने कहा, "लोकसभा चुनाव जीतकर संसद जाना एक आसान काम है, लेकिन मैं मध्यप्रदेश के 7.5 करोड़ लोगों से भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ हूं। मैं पद से प्यार नहीं करता, मैं अपने लोगों से प्यार करता हूं। और मैंने अपनी पार्टी से मुझे राज्य की सेवा का मौका देने के लिए कहा है।"

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बीते 57 दिनों में भाजपा के लिए 10 राज्यों में 125 जनसभाओं को संबोधित कर चुके चौहान ने कहा कि भाजपा राज्य में सरकार बना सकती थी, लेकिन हमने लोगों के जनादेश का सम्मान किया, क्योंकि हमें कांग्रेस के मुकाबले कम सीट मिली थीं।

यह पूछे जाने पर कि कमलनाथ सरकार कितने दिनों तक शासन करेगी? उन्होंने कहा, "बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती कांग्रेस से खफा हैं, क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उनके विधायक को कांग्रेस में मिला लिया। इसलिए अगर सरकार खुद से ही गिर गई तो हम कुछ नहीं कर सकते।"

इस बारे में और पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "अगर ऐसी स्थिति पैदा हुई तो हम देखेंगे कि क्या कर सकते हैं। इस समय हम मुद्दों पर सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ने पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे।"

यह पूछे जाने पर कि क्या नरेंद्र मोदी सरकार सत्ता में वापस आएगी? चौहान ने कहा, "मोदी सरकार सत्ता में वापस आएगी। मैंने राज्य की सभी 29 सीटों को कवर किया है और मोदी के स्पष्ट ट्रैक रिकार्ड और सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता की वजह से मैंने लोगों का उनका समर्थन करते देखा है।"

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उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा अकेले 300 सीटों पर कब्जा करेगी।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, "लोगों के पास मोदी का विकल्प नहीं है। यहां तक कि विपक्ष के पास भी इस बात का जवाब नहीं है कि अगर मोदी नहीं तो फिर कौन?"

उन्होंने कहा कि लोग बीते पांच वर्षो में मोदी द्वारा किए विकास कार्यो की वजह से उनका समर्थन करेंगे।