अयोध्या : अयोध्या के पास अंबेडकरनगर की रैली में प्रधानमंत्री ने कहा कि ये देश के स्वाभिमान की धरती है, यही स्वाभिमान पिछले पांच साल में काफी बढ़ा है। हम देश में हर किसी को साथ लेकर चले हैं जिसके बूते हम नए भारत का सपना साकार करने की ओर बढ़ रहे हैं।

पीएम ने कहा कि देश को सपा-बसपा-कांग्रेस की सच्चाई जानना जरूरी है, मायावती ने बाबा साहेब के नाम का इस्तेमाल किया लेकिन उनका आदर्शों का पालन नहीं किया। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्होंने भी राम मनोहर लोहिया के आदर्शों को मिट्टी में मिला दिया।

पीेेएम मोदी ने कहा कि कोई गरीब अपने बच्चे को गरीब नहीं देखना चाहताऔर कोई चायवाला ये नहीं सोचता कि उसका बेटा चायवाला बने। अंबेडकरनगर में पीएम मोदी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि चाहे वह सपा हो, बसपा या कांग्रेस, उनकी हकीकत जानना जरूरी है। ये महमिलावटी गठबंधन वाले सिर्फ अपना हित साधने में लगे हुए हैं।

बहन जी ने बाबासाहेब अम्बेडकर के नाम का इस्तेमाल किया लेकिन उन्होंने अपने सिद्धांतों के ठीक विपरीत काम किया। सपा ने लोहिया जी के नाम का इस्तेमाल किया, लेकिन उन्होंने यूपी की कानून-व्यवस्था की स्थिति को नष्ट कर दिया।

पीएम नरेंद्र मोदी बुधवार को बतौर प्रधानमंत्री पहली बार अयोध्या के पास अंबेडकर नगर का दौरा किया। हालांकि, वह हनुमानगढ़ी मंदिर या अस्थायी राम मंदिर नहीं जाएंगे। यह मसला स्थानीय लोगों के लिए हैरानी की वजह बन गया है और वे सवाल कर रहे हैं कि ‘अयोध्या से मोदी की दूरी क्यों? अयोध्या मंदिर रैली स्थल से दूर नहीं है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शन करने आए थे।

निर्वाणी अखाड़ा और राम जन्मभूमि मुकदमे के प्रमुख वादी धरमदास ने कहा, ‘हम चाहेंगे कि प्रधानमंत्री मंदिर की आधारशिला रखें। मैं पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कह चुका हूं कि वह मोदी से इसकी गुजारिश करें।’

फैजाबाद में नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास का कहना है कि प्रधानमंत्री को अयोध्या शहर में जरूर आना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘यह राममंदिर मुद्दे पर एक भरोसेमंद आश्वासन हो सकता है।’

पीएम मोदी बुधवार को रामपुर माया में रैली करेंगे, जो अयोध्या-अंबेडकरनगर जिले की सीमा पर एक छोटा सा शहर है। यहां से अयोध्या के विवादित ढांचे की दूरी महज 25 किलोमीटर है। पीएम मोदी यह रैली फैजाबाद और अंबेडकर नगर लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशियों के समर्थन में कर रहे हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 2017 विधानसभा चुनाव और प्रियंका 2019 में अयोध्या आ चुकी हैं। दोनों हनुमानगढ़ी मंदिर गए थे, लेकिन विवादित स्थल से दूरी बनाकर रखी थी। राहुल और प्रियंका की दलील थी कि राममंदिर का मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए वे अस्थायी राममंदिर में नहीं जा रहे हैं। हालांकि, मोदी पिछले पांच सालों में हनुमानगढ़ी भी नहीं गए हैं, जिससे पुजारी और स्थानीय लोग हैरान हैं।

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हनुमानगढ़ी मंदिर के आसपास के दुकानदारों के साथ अयोध्या के स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री ‘राममंदिर पर सियासत’ नहीं करना चाहते और मामला अदालत में होने वजह से यहां आने से बच रहे हैं।

हनुमानगढ़ी मंदिर में मिठाई बेचने वाले दुकानदारों के एक समूह का कहना है, ‘हालांकि, इंदिरा गांधी जैसी पूर्व प्रधानमंत्री ही हनुमानगढ़ी मंदिर गई थीं। प्रधानमंत्री वाराणसी में काशी विश्वनाथ और काल भैरव मंदिर में जाते हैं तो फिर यहां क्यों नहीं?’

निर्मोही अखाड़ी के महंत दीनेंद्र दास इस संक्षेप में समझाते हैं, ‘जब रामजी की इच्छा होगी तो वह (मोदी) जरूर आएंगे। तब हम उनका स्वागत करेंगे।’