इंदौर। लोकसभा चुनाव 2019 में दो चरणों का चुनाव पूरा हो चुका है। अब बारी तीसरे चरण की है। इसको लेकर रविवार को ही भाजपा ने कैंडिडेट की नई लिस्ट जारी की है। इस नई लिस्ट में एमपी में भाजपा की गढ़ रही इंदौर लोकसभा सीट का भी नाम है। मौजूदा सांसद सुमित्रा महाजन के चुनाव ना लड़ने की खबर सामने आने के बाद इस सीट पर काफी दिनों से कैंडिडेट सिलेक्शन को लेकर उहापोह की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि भाजपा ने मध्यप्रदेश की इस हाईप्रोफाइल सीट के लिए शंकर लालवानी को अपना उम्मीदवार बनाकर उहापोह की स्थिति को शांत कर दिया है। लालवानी को टिकट देने के पीछे की जो वजह निकल कर सामने आ रही है वो यह है कि बीजेपी इस बार सिंधी वोट को भी अपने पाले में करना चाहती थी जिसकी वजह से लालवानी को टिकट दिया गया है। तो आइए जानते हैं शंकर लालवानी के बारे में...

पीएम मोदी का स्वागत करते शंकर लालवानी।
पीएम मोदी का स्वागत करते शंकर लालवानी।

बचपन से रहा है संघ से लगाव

लालवानी ने मुंबई से बी-टैक की पढ़ाई की है। बचपन से ही उनका लगाव संघ से रहा है। वे इंदौर सिंधी समाज, इंदौर स्वर्णकार समाज, मप्र स्वर्णकार संघ के अध्यक्ष रहे।वे भारतीय सिंधु सभा के 10 वर्ष तक अध्यक्ष भी रहे।

भाई को हराकर की थी चुनावी कैरियर की शुरुआत

शंकर लालवानी के चुनावी करियर की शुरुआत बेहद दिलचस्प रही है। इन्होंने साल 1994 में अपना पहला चुनाव भी भाजपा के टिकट पर लड़ा था। बीजेपी ने इन्हें सिंधी कॉलोनी के वार्ड से टिकट दिया था। वहीं इस चुनाव में जो सबसे दिलचस्प बात यह है कि इनके खिलाफ कोई दूसरा नहीं खुद के इनके छोटे भाई प्रकाश कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। दोनों के बीच हुए मुकाबले में शंकर ने जीत हासिल की।

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इसके बाद उन्होंने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ते चले गए और तीन बार पार्षद चुने गए। लालवानी डॉ. उमाशशि शर्मा के महापौर (मेयर) कार्यकाल में लालवानी ने सभापति जैसे महत्वपूर्ण पद का कार्यभार संभाल चुके हैं। लालवानी नगर अध्यक्ष भी रह चुके हैं। लालवानी का मुकाबला इस बार कांग्रेस के पंकज संघवी से होना है।