भोपाल। भाजपा ने भोपाल संसदीय सीट से मालेगाव ब्लास्ट में आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को इस बार टिकट दिया है। प्रज्ञा को टिकट दिए जाने के एक दिन बाद ही उनके लिए नई मुश्किलें खड़ी होती नजर आ रही हैं। दरअसल साल 2008 के मालेगांव विस्फोट में मारे गए छह लोगों में से एक के पिता ने गुरुवार को मुंबई में विशेष एनआईए अदालत में एक याचिका दायर की है। इस याचिका में अपीलकर्ता ने कोर्ट से साध्वी की जमानत रद्द किए जाने और चुनाव लड़ने से रोकने की मांग की है।

विशेष न्यायाधीश वी एस पडल्कर ने निसार अहमद के आवेदन पर साध्वी प्रज्ञा की ओर से जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। बता दें कि साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने चुनाव आयोग में साध्वी प्रज्ञा के चुनाव लड़ने के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में तहसीन पूनावाला ने प्रज्ञा को चुनाव लड़ने से रोकने की मांग की है। हालांकि, चुनाव आयोग ने पूनावाला की शिकायत को खारिज कर दिया था इस समय जमानत पर हैं।

साध्वी के खिलाफ याचिका दायर करने वाले 59 वर्षीय व्यक्ति ने अदालत में दलील दी है कि एनआईए की ओर से इस मामले में कोई कार्यवाही की जा रही लिहाजा उसका यह कर्तव्य है कि वह अदालत को इस बारे में सूचित करें।

बिलाल की याचिका में कहा गया है कि उनकी कोर्ट से रिक्वेस्ट है कि आरोपी नंबर 1 (ठाकुर) को मुंबई में अदालत की कार्यवाही में शामिल होने के लिए कहा जाय। इसके अलावा साध्वी को चुनाव ना लड़ाए जाने को लेकर भी एक केस में सुनवाई जारी है और जमानत रद्द करने की याचिका सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उप-न्यायिक है। उन्होंने ठाकुर की जमानत रद्द करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की थी, और उन्हें पिछले साल जुलाई में नोटिस जारी किया गया था।

वकील शाहिद नदीम के माध्यम से दायर अपनी याचिका में, बिलाल ने कहा कि ठाकुर ने बॉम्बे हाईकोर्ट के सामने एक लिखित बयान दायर किया, जिसमें 25 अप्रैल, 2017 को यह कहते हुए उनको जमानत दी गई कि वह बिना किसी सपोर्ट के वह चल भी नहीं सकती। उन्होंने प्रज्ञा पर तंज कसते हुए कहा कि 'वह इस प्रचंड गर्मी के महीने में में चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त रूप से स्वस्थ हैं", उन्होंने अदालत को "गुमराह" किया है। अपीलकर्ता (ठाकुर) की मेडिकल रिपोर्ट बताती है कि वह दुर्बल हो गई है और बिना सहारे के चल भी नहीं सकती। मेडिकल सर्टिफिकेट से पता चलता है कि आयुर्वेदिक अस्पताल में अपीलार्थी को इलाज चल रहा है।

हाईकोर्ट ने कहा था कि हमारी राय में, आयुर्वेदिक अस्पताल कैंसर से पीड़ित अपीलकर्ता का सही इलाज नहीं कर सकता है।कोर्ट ने यह भी कहा था कि वह आठ साल से अधिक समय से हिरासत में थी। ठाकुर प्रज्ञा ने लिखित याचिका के साथ मेडिकल रिपोर्ट भी पेश की थी जिसमें लिखा गया था वह स्तन कैंसर से पीड़ित थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि वह इस मामले की "तथ्यों और परिस्थितियों की समग्रता" को यह तय करने में काफी समय लग रहा लिहाजा उन्हे जमानत दे दी जाय। हाईकोर्ट द्वारा जमानत इस शर्त पर दी गई थी कि उन्हें स्पेशल कोर्ट में सुनवाई के दौरान पेश होना पड़ेगा।

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बिलाल की ओर से दी गई दलील में दावा किया गया है कि साध्वी मुकदमें को अचानक हल्के में ले रही है और परीक्षण के दौरान उनकी अनउपलब्ध्ता से गंभीर संदेह पैदा हो रहा है। वर्तमान में अभियुक्त साध्वी किसी भी सुनवाई में हिस्सा नहीं ले रही हैं। उन्होंने दूर यात्रा ना कर पाने को लेकर कोर्ट से छूट मांगी है और उनकी अनुपस्थिति में साक्ष्य की रिकॉर्डिंग पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

ठाकुर का प्रतिनिधित्व करने वाले एडवोकेट रणजीत सांगले ने कहा: 'उन्होंने विशेष अदालत से इस आधार पर छूट मांगी थी कि उनके लिए भोपाल से नियमित रूप से यात्रा करना मुश्किल होगा क्योंकि परीक्षण दैनिक आधार पर आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा, घायल गवाहों के साक्ष्य की वर्तमान रिकॉर्डिंग उसके द्वारा स्वीकार की जाती है और इस तरह साध्वी की उपस्थिति की आवश्यकता नहीं होती है।'