पटना : लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान में थोड़ा ही समय रह गया है, लेकिन बिहार में नीतीश कुमार की जनता दल (युनाइटेड) ने अभी तक अपना घोषणापत्र जारी नहीं किया है। विपक्ष इसमे मुद्दों का ना होना बता रहा है तो जेडीयू ने इसे रणनीति का हिस्सा करार दिया है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी पार्टी के नेता घोषणापत्र के लेकर कई बार मंथन कर चुके हैं, लेकिन अब तक किसी निर्णय पर नहीं पहुंच सके हैं। इसलिए घोषणापत्र जारी करने की तारीख भी दो बार बदल चुकी है। पहले 9 अप्रैल और फिर 14 अप्रैल को घोषणापत्र जारी होना था, लेकिन अभी तक इस पर कोई सहमति नहीं बन सकी है।

पार्टी के नेताओं का मानना है कि यह रणनीति का हिस्सा है, जल्द ही घोषणापत्र के साथ हम जनता के बीच होंगे। वैसे भी भाजपा ने अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है, हम उसकी सहयोगी पार्टी हैं।

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार में एक चरण का मतदान हो चुका है, जेडीयू को इस बात का अंदाजा लग चुका होगा कि हवा उसके पक्ष में है कि नहीं। किस वर्ग की ओर ध्यान देना है और किस पर खास मेहरबानी करनी है। इस सबका ख्याल रखते हुए जेडीयू अपने घोषणापत्र को तैयार कर रही है।

दूसरी तरफ विपक्षी पार्टी इसे मुद्दा बनाकर तंज कस रही हैं। आरजेडी नेताओं का कहना है कि नीतीश कुमार ने पहले के वादे पूरे नहीं किए अब जनता के बीच कौन से नए वादे के साथ जाएंगे।

गौरतलब है कि बिहार में कुल 40 लोकसभा सीटें हैं। यहां पर सभी सात चरणों में मतदान होगा। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 22, कांग्रेस 2, एनसीपी 1, जेडीयू 2, लोक शक्ति पार्टी 6, राष्ट्रीय जनता दल 4 और अन्य ने 3 सीटें जीती थी।