नई दिल्ली / पटना: बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने अपनी किताब 'गोपालगंज टु रायसीनाः माइ पॉलिटिकल जर्नी' में बड़ा खुलासा किया है। किताब के अंश के मुताबिक महागठबंधन छोड़ने के महज 6 महीने के भीतर नीतीश फिर से उनके साथ होना चाहते थे। जिसे लालू प्रसाद ने पूरी तरह खारिज किया।

लालू ने बेहद शालीन अंदाज में किताब में जिक्र किया कि नीतीश कुमार के प्रति उनके मन में आदर है, लेकिन भरोसा बिल्कुल भी नहीं रहा।

लालू प्रसाद अपनी बात को पुख्ता करने के लिए प्रशांत किशोर के नाम का हवाला दिया। लालू प्रसाद की किताब के मुताबिक महागठबंधन से किनारा करने के महज छह महीने बाद प्रशांत किशोर नीतीश के दूत बनकर उनसे करीब पांच बार मिले। लेकिन लालू ने नीतीश के प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

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वहीं लालू प्रसाद की किताब में किए दावे पर जेडीयू महासचिव केसी त्यागी ने प्रतिक्रिया दी। त्यागी के मुताबिक 2017 में राजद से नाता तोड़ने के बाद पार्टी स्तर पर लालू प्रसाद से कोई संपर्क नहीं साधा गया।

बता दें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव की पुस्तक 'गोपालगंज टु रायसीना: माइ पॉलिटिकल जर्नी' का जल्द ही लोकार्पण होना है। इस किताब में लालू प्रसाद लिखते हैं, "किशोर यह जताने की कोशिश कर रहे थे कि अगर मैं जेडी (यू) को लिखित में समर्थन सुनिश्चित कर दूं तो वह बीजेपी से गठबंधन तोड़कर महागठबंधन में दोबारा शामिल हो जाएंगे। हालांकि, नीतीश को लेकर मेरे मन में कोई कड़वाहट नहीं है, लेकिन मेरा उन पर से विश्वास पूरी तरह हट चुका है।"

वहीं लालू की किताब पर प्रशांत किशोर ने कोई प्रतिक्रिया देने से साफ मना कर दिया। प्रशांत ने न ही लालू की बातों पर हामी भरी और न ही इससे इनकार किया। वहीं बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने लालू प्रसाद के दावे को सिरे से खारिज किया।