लखनऊ : भारतीय जनता पार्टी किसी कीमत पर उत्तर प्रदेश में पिछले 2014 के लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को दोहराना चाहती है और इसके लिए कई तरह की नई रणनीति पर चर्चा हो रही है। इसमें एक रणनीति पार्टी के कई वर्तमान सांसदों के टिकट काटकर नए चेहरे को मैदान में उतारने की है। इनकी संख्या दो चार नहीं बल्कि दो दर्जन के आसपास बताई जा रही है। इसको लेकर पार्टी के नेताओं में हलचल मची हुई है।

हमारे देश में अक्सर कहा जाता है कि केन्द्र सरकार की सत्ता की चाबी उत्तर प्रदेश के हाथों में होती है और इसी के तहत नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश की वाराणसी सीट को चुनकर लोकसभा में जाने का फैसला किया था और इसका असर यह हुआ की भाजपा व उनके सहयोगी दलों के साथ मिलकर भाजपा ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 72 सीटें जीत ली थीं। सूत्रों की मानें तो, अब सपा-बसपा के गठबंधन के बाद भाजपा के नेताओं को लगने लगा है कि अगर पार्टी ने कुछ नया प्रयास नहीं किया तो अबकी बार सीटें कम हो जाएंगी। इसीलिए विवादस्पद और क्षेत्रों में कामकाज को लेकर ढीले सांसदों का टिकट काटने की योजना तैयार हो चुकी है।

इनके सांसदों पर है नजर...

बलिया-भरत सिंह, सलेमपुर- रविंद्र कुशवाहा, कुशीनगर- राजेश पांडेय, भदोही- वीरेंद्र सिंह, राबर्ट्सगंज- छोटेलाल खरवार, जौनपुर- कृष्णाप्रताप, मछलीशहर- रामचरित्र निषाद, बस्ती- हरीश द्विवेदी, संतकबीरनगर- शरद त्रिपाठी, अकबरपुर -देवेंद्र सिंह, घोसी-हरिनारायण राजभर इलाहाबाद-श्यामाचरण गुप्ता, अंबेडकरनगर- हरिओम पांडेय, बहराइच- सावित्री बाई फूले (पार्टी छोड़ दिया है), श्रावस्ती- दद्दन मिश्रा, हरदोई- अंशुल वर्मा, मिश्रिख- अंजू बाला, आंवला- धर्मेंद्र कश्यप, इटावा- अशोक दोहरे, फतेहपुर-निरंजन ज्योति, फतेहपुर सिकरी- चौधरी बाबूलाल, हमीरपुर- कुंवर पुष्पेंद्र सिंह, रामपुर- नैपाल सिंह, धौरहरा- रेखा वर्मा, संभल- सत्यपाल सिंह सैनी, मेरठ- राजेंद्र अग्रवाल, बाराबंकी- प्रियंका रावत, उन्नाव- साक्षी महराज।

साक्षी महाराज दे चुके हैं चेतावनी

इन बातों में दम इसलिए भी दिख रहा है कि अभी कुछ दिन पहले साक्षी महाराज ने प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष को चिट्ठी लिखकर इस तरह के कयास पर अपना विरोध जताया था। कहा तो यह भी जा रहा है कि टिकट काटने पर वह भाजपा को इसका खामियाजा भुगतने की धमकी दे चुके हैं। हालांकि बाद में वह इस बात का खंडन कर चुके हैं।

इसे भी पढ़ें :

जेपी नड्डा का दावा, उत्तर प्रदेश में 73 नहीं बल्कि इतनी सीटें जीतेगी भाजपा

कब -कब और किन -किन नेताओं ने चलाया जूता - चप्पल और हाथ, यहां पढ़ें पूरी स्टोेरी

छोटेलाल खरवार भी हैं नाराज

सोनभद्र के सांसद ने भी कई बार पार्टी के आलानेताओं को चिट्ठी लिखकर पार्टी में अपनी अनदेखी व बात न सुने जाने का मामला उठाया है। फिलहाल व टिकट को लेकर चुप्पी साधे हैं, लेकिन मिल रहे संकेतों के मुताबिक भाजपा उनका विकल्प तलाश रही है।

श्यामाचरण गुप्ता भी नाराज

इलाहाबाद से सांंसद श्यामा चरण गुप्ता के भी हावभाव और बयानों को देखकर लगता है कि पार्टी के अंदर चल रही कानाफूंसी के कारण वह टिकट कटने की स्थिति में फिर से सपा या किसी अन्य दल का दामन थाम सकते हैं। वह अपना टिकट कटने पर अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे हैं।

जूता कांड वाले सांसद पर संदेह

संत कबीर नगर में जूता कांड के बाद चर्चा में आए सांसद शरद त्रिपाठी पर भाजपा नेताओं की राय बदल रही है और माना जा रहा है कि अबकी बार पार्टी उन्हें टिकट न दे और चुनाव बाद किसी और जगह सेट करने का आश्वासन देकर शांत कराने की कोशिश करे।

हालांकि पार्टी ने अभी इस पर किसी तरह की घोषणा या मौजूदा सांसदों से बातचीत नहीं की है, पर जिन सांसदों का फीडबैक अच्छा नहीं है, उन्हें इस बात की धीरे धीरे एहसास होने भी लगा है।