नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा हो चुकी है। इसके साथ ही सभी पार्टियां तैयारी में जूट गई है। विपक्षी दल भले ही साथ आकर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को सत्ता से बाहर करने की योजना बना रहे हैं, लेकिन उनके हाथ सफलता लगती नहीं दिख रही।

सी-वोटर की ओर से हाल ही में किए गए सर्वे के मुताबिक एनडीए आम चुनाव में बहुमत से थोड़ा दूर रहेगा, लेकिन चुनाव बाद गठबंधन के जरिए आराम से सरकार बना लेगा। उत्तर प्रदेश में महागठबंधन न होने की स्थिति में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले एनडीए को 300 से अधिक सीटें मिल सकती हैं।

सी-वोटर द्वारा किए गए ताजा राष्ट्रीय सर्वेक्षण के अनुसार, उत्तर प्रदेश की जंग अगले लोकसभा की तस्वीर को तय करने का काम करेगी। यह सर्वेक्षण मार्च में उस समय किया गया, जब मोदी सरकार ने पाकिस्तान में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शिविर पर हवाई हमला किया, जिसके कारण पूरे देश में राष्ट्रवाद की लहर पैदा हो गई।

भाजापा को उम्मीद है कि इस लहर पर सवार होकर वह विपक्ष को मात दे देगी और सर्वेक्षण ने इस बात की पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री मोदी दौड़ में आगे हैं। सर्वेक्षण में एनडीए को 264 सीटें दी गई हैं, जबकि यूपीए को 141 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा अन्य दलों को 138 सीटें मिल सकती हैं। यदि उत्तर प्रदेश में महागठबंधन नहीं होता है तो ऐसी स्थिति में एनडीए 307 सीटें हासिल कर लेगा और यूपीए 139 सीटें और अन्य दलों के खाते में 97 सीटें जा सकती हैं।

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भाजपा को मिल सकती हैं 220 सीटें

सीटों के मामले में भाजपा को अकेले 220 सीटें और उसके गठबंधन सहयोगियों को 44 सीटें मिल सकती हैं। यदि एनडीए वाईएसआर कांग्रेस, मीजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ), भाजपा और टीआरएस से चुनाव बाद गठबंधन करता है तो उसकी सीटों की संख्या 301 हो जाएगी।

यूपीए के खाते में 226 सीटें आएंगी

यूपीए खेमे में कांग्रेस को 86 सीटें मिलने की संभावना है और अन्य पार्टियां इसमें 55 सीटें और जोड़ेंगी। यूपीए अगर चुनाव बाद गठबंधन करता है और इसमें एआईयूडीएफ, एलडीएफ, महागठबंधन, टीएमसी शामिल होती हैं तो सीटों का कुल आंकड़ा 226 हो जाएगा। उत्तर प्रदेश में महागठबंधन की स्थिति में भाजपा पिछले चुनाव में मिली 71 सीटों के मुकाबले 29 पर सिमट सकती है।

महागठबंधन होने पर भाजपा की स्थिति

महागठबंधन नहीं होने की स्थिति में बीजेपी 2014 के परिणाम दोहरा सकती है और 72 सीटें हासिल कर सकती है। बीजेपी को सबसे ज्यादा सीटें बिहार (36, 2014 में मिले 22 से ज्यादा), गुजरात (24, पिछली बार मिले 26 से 2 कम), कर्नाटक (16, 2014 के मुकाबले 1 कम), मध्य प्रदेश (24, पिछली बार के 26 के मुकाबले 2 कम), महाराष्ट्र (36, 2014 में मिले 23 से 13 ज्यादा), ओडिशा (12, पिछली बार 1 सीट मिली थी) और राजस्थान (20, 2014 के मुकाबले 4 कम) में मिल सकती हैं।

कांग्रेस की स्थिति में सुधार

कांग्रेस 2014 के 44 मुकाबले बेहतर करेगी। उसे असम (7, 2014 में 3 सीट थी), छत्तीसगढ़ (5, पिछली बार 1 सीट थी), केरल (14, 2014 से 1 ज्यादा), कर्नाटक (9, पिछली बार भी 9 थी), झारखंड (5, 2014 से 1 सीट कम), मध्य प्रदेश (5, 2014 में 3 थी), महाराष्ट्र (7, 2014 में 4 थी), पंजाब (12, पिछली बार 3 थी), राजस्थान (5, 2014 में कोई सीट नहीं थी), तमिलनाडु (4, पिछली बार सीट नहीं मिली थी) और उत्तर प्रदेश (4, पिछली बार 2 थी)।

मतदान प्रतिशत के संदर्भ में देखें तो संप्रग को 31.1 फीसदी मत मिल सकते हैं। पिछली बार यह 30.9 प्रतिशत था। अन्य दलों को 28 फीसदी मत मिल सकते हैं।