भोपाल : लोकसभा चुनाव की तारीखें रविवार शाम तक आने वालीं हैं। इससे पहले मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार ने ओबीसी वोटर्स को अपनी ओर खींचने के लिए बड़ा दांव खेला है। दरअसल चुनाव की डेट की घोषणा से एक दिन पहले सरकार ने ओबीसी के लिए आरक्षण 14 फीसदी से बढ़ाकर 27 फीसदी कर दिया है। इसके लिए सरकार ने बाकायदा अध्यादेश का गजट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। खबरों की मानें तो राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने शनिवार को ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण के अध्यादेश को मंजूरी दी थी। इस अध्यादेश को मंजूरी मिलते ही अब प्रदेश में रिजर्वेशन की सीमा 50 फीसदी से बढकर 63 फीसदी हो गई है।

कमलनाथ सरकार के इस कदम के पीछे कयास यह लगाए जा रहे हैं कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी ओबीसी वर्ग से ही हैं, जिसे साधने के लिए कांग्रेस जुटी हुई है। बता दें कि ओबीसी का एक बड़ा वर्ग शिवराज सिंह के समर्थन वाला वर्ग माना जाता था।

बीजेपी ने बताया चुनावी शिगूफा

एमपी के पूर्व सीएम और बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के इस कदम को चुनावी शिगूफा बताया है। चौहान ने कहा कि जनता जानती है कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह के कदम केवल और केवल चुनावी शिगूफा है। हालांकि उन्होंने सरकार द्वारा ओबीसी को रिजर्वेशन दिए जाने का समर्थन किया लेकिन सरकारी की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर सरकार वाकई गंभीर है तो मोदी सरकार की तरह कदम उठाए।

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देश का पहला राज्य होगा मध्यप्रदेश जहां ओबीसी को 27 फीसदी मिलेगा रिजर्वेशन

सरकार द्वारा 27 फीसदी ओबीसी रिजर्वेशन को लेकर अध्यादेश जारी करने की जानकारी राज्य के कानून मंत्री पी.सी शर्मा ने जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अध्यादेश जारी किया गया है और अधिसूचित किया गया है। इससे अब राज्य में ओबीसी वर्ग को सरकारी नौकरी में 14 प्रतिशत से बढ़कर 27 फीसदी आरक्षण मिलेगा। सरकार के इस कदम के बाद मध्यप्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य हो जाएगा जहां ओबीसी वोटरों को नौकरी में 27 फीसदी आरक्षण मिलेगा वहीं राज्य में एससी को 16 और एसटी को 20 फीसदी रिजर्वेशन मिल रहा है।