लखनऊ : बसपा सुप्रीमो मायावती के सोशल मीडिया पर आने से इस बहस को हवा मिल गई है कि क्या वास्तम में इस प्लेटफॉर्म के बिना अपने समर्थकों तक पहुंचना नेताओं के लिए आसान नहीं रह गया है।

टीवी, अखबार से दूर रहने वालीं मायावती ने ट्विटर के जरिए सोशल मीडिया में एंट्री की है तो इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। आइये जानते हैं कि बसपा सुप्रीमो को लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इसकी जरूरत क्यों पड़ी।

लोकसभा चुनाव 2014 में जिस तरह नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया का बखूबी इस्तेमाल करके जनता तक अपनी पहुंच बनाई और उसकी बदौलत आसानी से घर तक पहुंचे, ऐसा ही कुछ मायावती आगामी लोकसभा चुनाव में करना चाहती हैं। तमाम नेता सोशल मीडिया की ताकत को परखते हुए उसका इस्तेमाल करते हैं। इसलिए बसपा सुप्रीमो ने भी ट्विटर के जरिए समर्थकों तक पहुंच बनाने का फैसला किया है।

पुरानी धारणा को बदलने का वक्त

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मायावती हमेशा जानती थीं कि उनका वोटर अखबार और टीवी से दूर रहता है। इसलिए उन्होंने कभी भी मीडिया को अपना हथियार नहीं बनाया। माना जाता था कि मायावती का वोटर दो जून की रोटी के लिए संघर्ष करता है तो भला वह सोशल मीडिया पर क्या करेगा। अब समय की मांग को देखते हुए बसपा सुप्रीमो को सोशल मीडिया की अहमियत पता चल गई है और वह यह भी जानती हैं कि आज के समय में हर कोई इस माध्यम से जुड़ा हुआ है।

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सोशल मीडिया पर दलित नेताओं की फौज

एक वजह यह भी है कि पिछले कुछ दिनों में कई दलित नेता सोशल मीडिया के जरिए हीरो बन गए हैं। फिर चाहे वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चंद्रशेखर हो या गुजरात के जिग्नेश मेवानी और महाराष्ट्र के कई दलित नेता, इन्होंने इस माध्यम के जरिए दलित जनता के बीच अपनी एक पैठ बनाई और आंदोलनों को सफल बनाया। ऐसे में मायावती भी समझ गई हैं कि मीडिया के इस प्लेटफॉर्म के बिना अब राजनीति संभव नहीं है। ऐसे में उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपना संदेश फैलाने का फैसला किया है।

मायावती का पहला संदेश

मायावती 22 जनवरी को ट्विटर पर शामिल हुईं। उन्होंने अपने पहले ट्वीट में कहा, "हेलो, भाइयों और बहनों। मैं आदर सम्मान के साथ ट्विटर परिवार से खुद का परिचय करा रही हूं।" मायावती ने अपने पहले संदेश में कहा, "भविष्य की बातचीत, टिप्पणी मेरे आधिकारिक ट्विटर हैंडल 'एट दि रेट सुश्रीमायावती' पर होगी।"

अपने स्वागत पोस्ट के कुछ मिनटों बाद उन्हें हजारों लाइक मिले। मायावती के 9,759 फालोवर्स है, जिसके उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री के जारी बयान के बाद बढ़ने की उम्मीद है। बसपा के एक बयान में कहा गया, "उनके आधिकारिक ट्विटर अकांउट का इस्तेमाल राष्ट्रीय व राजनीतिक महत्व के विभिन्न मुद्दों पर उनकी राय जाहिर करने के लिए किया जाएगा।"