मुंबई : लोकसभा चुनाव 2019 नजदीक है, ऐसे में गठबंधन को मजबूत करने के लिए सभी पार्टियां प्रयास कर रही है। नाराज चल रहे एनडीए के सहयोगी दलों में से एक शिवसेना को अब मनाने के प्रयास तेज हो गए हैं, जिसकी जिम्मेदारी जेडीयू के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर को दी गई है। हालांकि राजनीतिक गलियारे में इस मुलाकात के अलग मायने भी निकाले जा रहे हैं।

कुछ लोगों का मानना है कि कहीं चुनाव से पहले जेडीयू और शिवसेना भाजपा को बड़ा झटका न दे दे। हालांकि इस बात की अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है।

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मंगलवार को प्रशांत किशोर ने उनके मुंबई स्थित आवास पर मुलाकात की। माना जा रहा है कि शिवसेना को मनाने के लिए प्रशांत किशोर को आगे लाया गया है। सूत्रों की मानें तो एनडीए के सहयोगी दल जेडीयू और शिवसेना के रिश्ते भाजपा के मुकाबले अच्छे हैं। ऐसे में भाजपा जेडीयू के सहारे शिवसेना को मनाने की कोशिश कर रही है।

गौरतलब है कि भले ही भाजपा की तरफ से सुलह की कोशिस हो रही हो, लेकिन शिवसेना के तेवर कम नहीं हुए है। पश्चिम बंगाल में जारी विवाद पर भी शिवसेना ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का समर्थन किया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा।

शिवसेना ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह आगामी लोकसभा चुनाव में फायदा पाने के लिए रची गई एक सोची समझी साजिश थी। शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना' में कहा कि कोलकाता में जो कुछ भी हो रहा है उससे ‘‘लोकतंत्र को खतरा'' है।

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उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने कहा, ‘‘शारदा चिटफंड घोटाले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाना चाहिए लेकिन सीबीआई ‘चिट इंडिया' मामले को कैसे देखती है..जो कि पिछले साढ़े चार साल से चल रहा है।''

अपने विचारों पर विस्तृत जानकारी दिए बिना उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी को देश के प्रधानमंत्री के तौर पर कोलकाता में जारी संकट पर ध्यान देना चाहिए ना कि एक भाजपा नेता की तरह। शिवसेना ने साथ ही दावा किया कि भाजपा को इस बार लोकसभा चुनाव में उत्तर भारत से महाराष्ट्र तक (पश्चिम भारत तक) 100 सीटों का नुकसान होगा।