नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने लखनऊ में 1500 करोड़ रुपये के गोमती रिवरफ्रंट विकास परियोजना के संबंध में गुरुवार को दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में 10 जगहों पर छापे मारे।

प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी ने मीडिया से कहा, "सुबह से हमारी टीमें गोमती रिवरफ्रंट परियोजना मामले में धनशोधन के आरोपों की जांच के तहत छापे मार रही हैं।" ईडी ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों और इंजीनियरों के आवासों समेत कई जगहों पर छापे मारे हैं।

ईडी मामले के संबंध में दस्तावेजों और सबूतों की तलाश में है। एजेंसी पता लगानी चाहती है कि क्या आरोपियों ने इस विकास परियोजना के सौंदर्यीकरण के लिए दी गई राशि का धनशोधन किया या फिर इससे अवैध संपत्ति बनाई।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस संबंध में दिसंबर 2017 में एफआईआर दर्ज की थी, जिस पर संज्ञान लेते हुए ईडी ने 30 मार्च 2018 को धनशोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया था।

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद सीबीआई ने मामले की जांच अपने हाथ में ली। परियोजना को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंजूरी दी थी।

ये है पूरा मामला

अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी के शासन में साल 2015 में गोमती रिवर फ्रंट का काम शुरू किया गया था। जिसके लिए शुरूआती बजट 550 करोड़ रूपये तय किया गया था। लेकिन बाद में इसकी लागत बढ़कर 1467 करोड़ रुपये कर दी गई थी।

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बाद में योगी सरकार के आने तक परियोजना पर 1427 करोड़ रुपये खर्च भी हो चुके थे। जिसे लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा बैठक की तो परियोजना पूरी करने के लिए 1500 करोड़ से ज्यादा का अतिरिक्त बजट और बताया गया।

इस पर सीएम की नाराजगी के बाद जांच शुरू हुई। पहले एक जज की कमिटी ने जांच की। उसके बाद नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना की अध्यक्षता में एक कमिटी बनाई गई। इसके बाद सीबीआई जांच की सिफारिश भी हुई।