नई दिल्ली: 23 साल पुरानी दुश्मनी को भुलाते हुए आगामी लोकसभा चुनाव के लिए अखिलेश यादव और मायावती ने महागठबंधन का घोषणा कर दी है। इस गठबंधन के बाद से ही इस बात की चर्चा उठ खड़ी हुई है कि एक दूसरे को दुश्मन मानने वाली सपा और बसपा के बीच इस गठबंधन के पीछे किस नेता का हाथ है। तो आइए हम आपको बताते हैं उस व्यक्ति के बारे में जिसने इन दो पार्टियों को एक साथ लाने का काम किया है।

गठबंधन को लेकर मायावती और अखिलेश के बीच हुई बात की शुरूआत यूपी के गोरखपुर और फूलपूर में हुए लोकसभा उपचुनाव के बाद से होनी शुरू हो गई थी। इन दोनों ही जगहों पर माया और अखिलेश ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और जबरदस्त विजय हासिल की थी। इस जीत के बाद उसी मायावती ने अखिलेश यादव के लिए मर्सडीज गाड़ी भिजवाई। अखिलेश यादव जब मायावती के सरकारी आवास '13 ए माल एवेन्यू' पहुंचे तो खुद बसपा सुप्रीमो ने बुके देकर सपा अध्यक्ष का स्वागत किया।

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मीडिया में चल रही खबरों के मुताबिक सूत्रों के हवाले से बताया गया कि महागठबंधन के लिए अखिलेश यादव और मायावती की मुलाकात संजय सेठ ने करवाई थी। इस मुलाकात में संजय भी शामिल थे। इसके बाद से ही दोनों ही दलों के बीच गठबंधन की बात शुरू हुई।

संजय सेठ।
संजय सेठ।

एसपी के दिग्गज नेताओं में से एक हैं संजय सेठ

पेशे से बिल्डर और समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेताओं में से एक संजय सेठ वर्तमान में राज्यसभा सांसद हैं। वे सपा में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। संजय सेठ मुलायम सिंह के करीबी माने जाते हैं। वे मुलायम सिंह के बेटे प्रतीक यादव के साथ वो शालीमार कॉर्प नामक रियल स्टेट कंपनी में पार्टनर भी हैं। बताया जाता है कि मुलायम सिंह यादव और अखिलेश के अलावा संजय सेठ के मायावती से भी बेहद अच्छे संबंध हैं।

38-38 सीटों पर लड़ेंगे दोनो दल

शनिवार को प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान दोनों ही दलों ने 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। बाकी बची 4 सीटों में दो सीटों पर बाद में निर्णय लिया जाएगा। दोनों ही दलों ने कांग्रेस को जगह नहीं दी है। इसके अलावा दोनों ही दलों ने आरएलडी को भी लेकर कोई घोषणा नहीं की है। माना जा रहा है कि इन दो सीटों को किसी नए सहयोगी के लिए रखा गया है। वहीं, अमेठी और रायबरेली में गठबंधन की ओर से कोई प्रत्याशी नहीं उतारा जाएगा। इन दोनों सीटों से क्रमश: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और सोनिया गांधी चुनाव लड़ते रहे हैं।