हैदराबाद: तेलंगाना के मुख्यमंत्री और तेलंगाना राष्ट्र समिति (तेरास) सुप्रीमो चंद्रशेखर राव के सुर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के लिए बदल गए हैं। माना जा रहा है कि केसीआर आगामी 19 जनवरी को कोलकाता में महागठबंधन की ओर से आहूत रैली में शामिल नहीं होंगे।

लोकसभा में तेरास के उप नेता बी विनोद कुमार ने साफ किया कि इस रैली में केसीआर का शामिल होना मुश्किल है। जब कुमार से पूछा गया कि क्या रैली में शामिल होने के लिए केसीआर को न्यौता मिला है? इस पर बिना सीधा जवाब दिए तेरास नेता ने कहा कि अगर न्यौता मिले तो भी केसीआर इस रैली में शामिल नहीं होंगे।

इससे पहले कोलकाता में केसीआर ने फेडरल फ्रंट के लिए समर्थन की मांग के साथ ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। इसके बाद महागठबंधन के नाम पर चंद्रबाबू नायडू भी ममता दीदी के शरण में गए थे। शायद केसीआर को यही बात चुभ गई। तेलुगू राज्यों में केसीआर की चंद्रबाबू के साथ प्रतिद्वंद्विता जगजाहिर है। वहीं केसीआर का फेडरल फ्रंट गैर बीजेपी और गैर कांग्रेस की नीति पर आधारित है। लिहाजा उनका रैली के मंच पर होना अप्रासंगिक माना जा रहा है।

पूरे राजनीतिक घटनाक्रम से तो तय है कि ममता बनर्जी का झुकाव कांग्रेस सहित महागठबंधन की तरफ है। केसीआर के फेडरल फ्रंट को एक तरह से तृणमूल कांग्रेस ने नकार दिया है।

19 जनवरी की प्रस्तावित रैली में ममता बनर्जी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरिवाल, बसपा सुप्रीमो मायावती, सपा प्रमुख अखिलेश यादव, डीएमके अध्यक्ष एम के स्टालिन, कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, एनसीपी प्रमुख शरद पवार और नेशनल कांफ्रेंस के नेता फारुख अब्दुल्लाह को न्यौता दिया है। इस पूरी लिस्ट से केसीआर जैसे कद्दावर नेता का नाम नदारत है।

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हाल के दिनों में राष्ट्रीय राजनीति में केसीआर की पूछ बढ़ी है। बताया तो ये भी जाता है कि केसीआर खुद भी केंद्र की सक्रिय राजनीति करने के इच्छुक हैं। 119 सदस्यों वाली तेलंगाना विधानसभा में केसीआर ने 88 सीटें जीतकर जबरदस्त कामयाबी हासिल की। वहीं कांग्रेस को तेलंगाना विस चुनाव में महज 19 सीटों और बीजेपी को 1 सीट पर संतोष करना पड़ा।

प्रदेश की राजनीति में दो दो राष्ट्रीय दलों को केसीआर ने चारों खाने चित्त कर दिया। अब कुछ इसी हौसले के साथ केसीआर केंद्र में भी दम दिखाने के इच्छुक हैँ। अगर केसीआर दिल्ली जाते हैं तो प्रदेश की कमान संभालने के लिए उनके पुत्र और राज्य सरकार में मंत्री केटीआर बैठे हैं। केटीआर की बतौर मुख्यमंत्री स्वीकार्यता में भी कहीं से कोई दिक्कत नहीं है।