भोपाल : पंद्रहवीं विधानसभा में परंपराओं के टूटने का क्रम जारी रहा और भारी हंगामे के बीच हिना कांवरे विधानसभा की उपाध्यक्ष चुन ली गईं। चुनाव के पहले विधानसभा में हंगामे की स्थिति बनी थी। विपक्ष के सदस्यों ने आसंदी के करीब पहुंचकर जमकर नारेबाजी की।

हंगामा देखकर स्पीकर एनपी प्रजापति ने 10 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी। लेकिन कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर ही हंगामा जारी रहा और फिर अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने हिना कांवरे को उपाध्यक्ष बनाने की घोषणा कर दी। इसी के साथ मप्र विधानसभा के इतिहास में पहला मौका है जब अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों ही एक ही पार्टी के हैं।

मध्यप्रदेश विधानसभा में उपाध्यक्ष पद के लिए आज (गुरुवार) चुनाव हुए। सत्तापक्ष कांग्रेस ने जहां हिना कांवरे को उम्मीदवार बनाया है तो भाजपा ने जगदीश देवड़ा को मैदान में उतारा है।

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राज्य में विधानसभाध्यक्ष का लगभग पांच दशक बाद चुनाव हुआ और कांग्रेस के एन पी प्रजापति को अध्यक्ष चुना गया। अब उपाध्यक्ष का चुनाव होने वाला है। आमतौर पर राज्य में अध्यक्ष का चुनाव आम सहमति से और उपाध्यक्ष का पद विपक्ष के विधायक को दिए जाने की परंपरा रही है। इस बार अध्यक्ष को लेकर खींचतान हुई और अब उपाध्यक्ष के लिए भी चुनाव होने जा रहा है।

राज्य की 15वीं विधानसभा के पहले सत्र का गुरुवार को चौथा दिन है। विधानसभा की कार्यसूची के अनुसार, आज तमाम सरकारी कामकाज निपटाने के बाद उपाध्यक्ष का चुनाव होगा। कांग्रेस की ओर से हिना कांवरे और भाजपा की ओर से जगदीश देवड़ा मैदान में है।

राज्य विधानसभा की स्थिति पर नजर दौड़ाई जाए तो पता चलता है कि राज्य विधानसभा में 230 सदस्य हैं। कांग्रेस के 114 और भजपा के 109 विधायक हैं। वहीं बसपा के दो, सपा के एक और चार निर्दलीय सदस्यों का समर्थन हासिल है। इस तरह कांग्रेस को कुल 121 विधायकों का समर्थन हासिल है।