नई दिल्ली : सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को आरक्षण देने संबंधी विधेयक को आज राज्यसभा में पेश किया गया। केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने इसे सदन के पटल पर रखा। राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है। विपक्ष ने सदन में बहस के दौरान जोरदार हंगामा किया, जिसके कारण कार्यवाही कई बार बाधित हुई।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर कांग्रेस सदस्यों के हंगामे के बीच संविधान (124वां संशोधन) विधेयक 2019 चर्चा एवं पारित करने के लिए सदन में रखा। लोकसभा इस विधेयक को मंगलवार को पारित कर चुकी है। इस विधेयक को उच्च सदन में पारित करने के लिए इसकी बैठक को एक दिन के लिए बढ़ाया गया है।

कांग्रेस के सदस्य चाहते थे कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह पहले सदन में आए और नागरिकता संबंधी विधेयक पर बयान दें। नागरिकता संबंधी विधेयक में पाकिस्तान, बांग्लादेश एवं अफगानिस्तान से आए गैर मुस्लिम प्रवासियों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान है। गहलोत ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह विधेयक सामान्य वर्ग के गरीबों को शिक्षा एवं रोजगार में दस प्रतिशत आरक्षण प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि इससे समाज के बड़े वर्ग को लाभ मिलेगा।

राज्यसभा में भाजपा के पास सबसे अधिक 73 सदस्य हैं, जबकि मुख्य विपक्षी कांग्रेस के 50 सदस्य हैं। राज्यसभा में अभी सदस्यों की कुल संख्या 244 है।

यह भी पढ़ें :

सवर्णों को आरक्षण विधेयक लोकसभा में पास, जानिए बिल की अहम बातें

सवर्णों को प्रस्तावित आरक्षण का लाभ आपको मिलेगा या नहीं? खबर पढ़कर जांचें

अति महत्वपूर्ण दो विधेयकों नागरिकता संशोधन विधेयक और सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के लिये संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिये सदन की बैठक एक दिन बढ़ानी पड़ी। नेता सदन अरुण जेटली ने भी नियमों का हवाला देकर कार्य अवधि बढ़ाने को सरकार और आसन का विशेषाधिकार बताया। इस मुद्दे पर हंगामा नहीं थमने पर उपसभापति हरिवंश ने आसन ने कार्य अवधि बढ़ाने की घोषणा नहीं किये जाने को ‘‘निजी चूक'' बताया।