नई दिल्ली : सवर्णों यानी सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने वाला संविधान 124वां संशोधन विधेयक मंगलवार को लोकसभा से पारित कर दिया गयागयागया. इस विधेयक के पक्ष में कुल 323 वोट पड़े, वहीं विरोध में सिर्फ 3 सदस्यों ने ही मतदान किया.

इस विधेयक के पास हो जाने के बाद सभी धर्मों की गैर आरक्षित जातियों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल सकेगा. इससे पहले सवर्ण आरक्षण के मुद्दे पर शाम करीब 5 बजे से शुरू हुई बहस रात 9.55 बजे तक चली. इसके बाद हुई वोटिंग में लोकसभा में मौजूद कुल 326 सांसदों ने भाग लिया

लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने बहस के बाद वोटिंग कराई, जिसमें संविधान संशोधन विधेयक के पक्ष में 323 सदस्यों ने वोट डाले, लेकिन 3 सांसदों ने इसका विरोध भी किया. बहरहाल, सवर्ण आरक्षण बि‍ल लोकसभा में पास हो गया.

सवर्ण आरक्षण को लेकर लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक पेश किया गया। मंत्री थावरचंद गहलोत ने सदन के पटल पर बिल को रखा। संविधान में 124वां संशोधन को लेकर बहस जारी है।

थावरचंद गहलोत ने बिल को पटल पर रखते हुए साफ किया कि आरक्षण के पुराने ढांचे से कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। मसौदे के मुताबिक आर्थिक रूप से कमजोर सवर्ण जाति के लोगों को ही आरक्षण मिलेगा। जिसमें मुस्लिम और ईसाई समुदाय के अल्पसंख्यक भी शामिल होंगे। आरक्षण का दायरा बढ़ाते हुए प्राइवेट शिक्षण संस्थानों में भी रिजर्वेशन का प्रावधान होगा।

सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने संबंधी संविधान 124वां संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश कर दिया गया है। केंद्रीय मंत्री थावर चंद्र गहलोत ने इसे लोकसभा में पेश किया। अब इस पर 5 बजे बहस शुरु शुरू होगी। भारतीय जनता पार्टी ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर आज संसद में मौजूद रहने को कहा है।

इस विधेयक के जरिए पहली बार गैर-जातिगत एवं गैर-धार्मिक आधार पर आरक्षण देने की कोशिश की गई है। प्रस्तावित आरक्षण अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) को मिल रहे आरक्षण की 50 फीसदी सीमा के अतिरिक्त होगा, यानी ‘‘आर्थिक रूप से कमजोर'' तबकों के लिए आरक्षण लागू हो जाने पर यह आंकड़ा बढ़कर 60 फीसदी हो जाएगा।

संविधान में होगा संशोधन

इस प्रस्ताव पर अमल के लिए संविधान संशोधन विधेयक संसद से पारित कराने की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में जरूरी संशोधन करने होंगे। संसद में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए सरकार को दोनों सदनों में कम से कम दो-तिहाई बहुमत जुटाना होगा।

कांग्रेस करेगी समर्थन

लोकसभा में तो सरकार के पास बहुमत है, लेकिन राज्यसभा में उसके पास अपने दम पर विधेयक पारित कराने के लिए जरूरी संख्याबल का अभाव है। यह पूछे जाने पर कि क्या कांग्रेस संसद में इस विधेयक को पारित करने में मदद करेगी, इस पर पार्टी प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘आर्थिक तौर पर गरीब व्यक्ति के बेटे या बेटी को शिक्षा एवं रोजगार में अपना हिस्सा मिलना चाहिए। हम इसके लिए हर कदम का समर्थन करेंगे।''

सूत्रों ने बताया कि लोकसभा में पारित होने के बाद इसे राज्यसभा को भेजा जाएगा। कांग्रेस ने शनिवार को अपने सांसदों को व्हिप जारी कर उनसे सोमवार और मंगलवार को संसद में मौजूद रहने को कहा था।

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लोकसभा चुनावों से पहले एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने ‘‘आर्थिक रूप से कमजोर'' तबकों के लिए नौकरियों एवं शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण को सोमवार को मंजूरी दे दी। भाजपा के समर्थन का आधार मानी जाने वाली अगड़ी जातियों की लंबे समय से मांग थी कि उनके गरीब तबकों को आरक्षण दिया जाए।

भाजपा ने मोदी सरकार के इस कदम को ‘‘ऐतिहासिक'' करार दिया जबकि विपक्ष ने इसके समय पर सवाल उठाया। कांग्रेस ने इसे ‘‘चुनावी जुमला'' करार दिया। बहरहाल, विपक्षी पार्टियों ने सरकार के इस कदम को अपना समर्थन व्यक्त किया है।