पटना : लोकसभा चुनाव से पहले लोक समता पार्टी के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा अपनी पार्टी का विलय शरद यादव की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (एलजेडी) के साथ करने की तैयारी में जुटे हुए थे। लेकिन इसी खबर आ रही है कि दोनों दलों के बीच विलय रुक गया है। इसके पीछे राजद का हाथ बताया जा रहा है।

रालोसपा सूत्रों के अनुसार, राजद प्रमुख इस विलय से खुश नहीं है। साथ ही रालोसपा किसी भी हाल में राजद को नाराज नहीं करना चाहेगी। उपेंद्र कुशवाहा और शरद यादव सीटों की हिस्सेदारी को लेकर भी लगातार बातचीत कर रहे थे।

हाल ही में रालोसपा के नेता ने कहा था कि शरद यादव की पार्टी से विलय होने के बाद आरएलएसपी एक बड़ी यूनिट के रूप में उभरेगी। दोनों ही दल प्रस्तावित विलय की ओर धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। आरएलएसपी नेता ने माना कि उनमें नेतृत्व को लेकर मुद्दा गरमा सकता है।

मीडिया रिपोर्टस के अनुसार, 2019 के लोकसभा चुनाव में शरद यादव सीतामढ़ी, जमुई और मधेपुरा की सीट चाहते हैं। इसको लेकर शरद यादव 5 जनवरी को लालू प्रसाद यादव से मिलने वाले हैं। इसके अलावा लोकतांत्रिक जनता दल के नेता गठबंधन के भविष्य और आरएलएसपी में विलय को उम्मीद कायम रखे हुए हैं।

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लेकतांत्रिक जनता दल के नेता अली अनवर ने कहा, "हम आरएलएसपी के साथ विलय की बात कर रहे हैं। बातचीत जारी है। यह आज नहीं तो कल होकर रहेगा। हमारा लक्ष्य है कि महागठबंधन भाजपा के खिलाफ सशक्त ताकत के रूप में उभरे।"

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (आरएलएसपी) को आगामी लोकसभा चुनाव में चार सीटें देने पर राजी हो गया है। यह बीजेपी नीत-एनडीए द्वारा उसे पेशकश की गई सीटों की दोगुनी संख्या है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि कुशवाहा ने कांग्रेस के साथ बातचीत करने के बाद रांची में आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद से मुलाकात की थी, जिसके बाद समझौते को अंतिम रूप दिया गया। आरएलएसपी नेता ने कहा कि सभी सीटों के बंटवारे के बारे में आधिकारिक घोषणा 14 जनवरी के बाद की जाएगी जब खरमास का महीना खत्म हो जाएगा।