नई दिल्ली: तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर की बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ दिल्ली में प्रस्तावित बैठक नहीं हो सकी। दरअसल केसीआर 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले गैर कांग्रेस, गैर बीजेपी गठबंधन बनाने की कवायद में जुटे हैं। माना जा रहा है कि अखिलेश और मायावती ने जानबूझकर तेरास नेता से किनारा किया है। दरअसल केसीआर फेडरल फ्रंट बनाकर केंद्र की राजनीति को नई दिशा देने में जुटे हैं।

हालांकि पत्रकारों की तरफ से बार बार सवाल खड़े करने पर सपा सुप्रीमो अखिलेश ने कहा कि वो आगामी 6 जनवरी को हैदराबाद जाकर केसीआर से मुलाकात करेंगे। वहीं मायावती ने केसीआर को मिलने का वक्त ही नहीं दिया। हालांकि माया ने केसीआर के खिलाफ तो कुछ नहीं कहा, लेकिन दिल्ली में उनसे मिलने से इनकार कर गईं।

समाजवादी पार्टी का दावा है कि किसी भी गैर बीजेपी मोर्चे में उनकी पार्टी के शामिल हुए बगैर ताकत नहीं आ सकती है। माया और अखिलेश की पार्टियां यूपी में काफी मजबूत स्थिति में हैं और बीजेपी को कड़ी टक्कर दे रही हैं।

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हालांकि माया और अखिलेश के किनारा करने के बावजूद केसीआर निराश नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बातचीत जारी रहेगी और जल्दी ही ठोस योजना लेकर वो सबके सामने होंगे।

केसीआर आज दिल्ली से देर शाम हैदराबाद लौट आएंगे। इससे पहले उनकी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और ओडिशा की मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई। जिसे सकारात्मक बताया जा रहा है।

दरअसल थर्ड फ्रंट में कांग्रेस पार्टी की भूमिका को लेकर ही किच किच है। यूपी की क्षेत्रीय पार्टियां बसपा और सपा कांग्रेस को भाव देने के लिए तैयार नहीं हैं। लिहाजा चंद्रबाबू सहित केसीआर के प्रयासों पर ये दोनों नेता खुलकर साथ नहीं दे पा रहे हैं।

ऐसे कयास भी लगाए जा रहे हैं कि यूपी में सपा-बसपा गठजोड़ में कांग्रेस को जगह नहीं मिल पाए। हालांकि इस बारे में सक्षम नेता साफ साफ कुछ बताने से परहेज करते हैं।