भोपाल : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ 17 दिसंबर को अपराह्न डेढ़ बजे भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मध्य प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। इससे पहले उन्होंने कहा कि किसानों का कर्ज माफ करना कांग्रेस पार्टी की पहली प्राथमिकता है। यदि बैंक व्यावसायियों को मोहलत दे सकते हैं तो किसानों को क्यों नहीं।

एक निजी समाचारपत्र को दिए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि कांग्रेस ने सरकार बनाने के 10 दिनों के अंदर कर्जमाफी का वादा किया था। हालांकि पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन ने कहा था कि कर्जमाफी से राज्यों की आर्थिक व्यवस्था के लिए काफी परेशानी खड़ी हो सकती हैं।

इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "यदि रघुराम राजन गांव को समझते हैं तो उन्हें बोलने दीजिए। मैं इन अर्थशास्त्रियों द्वारा अपने कमरों में बोले जाने वाली बातों से विचलित होने वाला नहीं हूं। आज एक किसान कर्ज में जन्म लेता है और उसकी पूरी जिंदगी कर्ज के बोझ तले दबी रहती है। किसानों का कर्जमाफ करना अत्यावश्यक है। इस बात को अपने दिमाग में रखिए कि मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था पैसों से नहीं बल्कि लोगों से गिनी जाती है।"

वहीं शिवराज सरकार पर हमला करते हुए कमलनाथ ने कहा कि एक विश्लेषण कीजिए कि क्यों पिछले चार सालों से किसानों को पैदावार के अच्छे दाम नहीं मिल रहे हैं। यहां बहुत सारी परेशानियां हैं। राज्य में कृषि उत्पादन बढ़ा है। सरकार ने पैदावार बढ़ाने के लिए कृषि कर्मण अवॉर्ड शुरू किए थे लेकिन कोई खरीद नहीं की।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार मंडियों की संख्या बढ़ा देती तो किसानों को अपनी पैदावार की खरीद की उम्मीद में कई दिनों तक लाइन में खड़ा नहीं रहना पड़ता। कांग्रेस सरकार ने गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य को 550 से बढ़ाकर 1,500 रुपये प्रति क्विंटल किया था। एनडीए ने कितना बढ़ाया? कितने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का फायदा मिला?