जयपुर : राजस्थान में इस बार अपेक्षाकृत कम संख्या में ही महिलाएं विधायक बन पाई हैं। कुल मिलाकर यह आंकड़ा 22 रहा है, जबकि 2013 में 28 महिलाएं विधायक के रूप में विधानसभा पहुंची थीं।

15वीं विधानसभा के लिए हुए चुनाव में जहां कांग्रेस ने 27 महिलाओं को टिकट दिया वहीं बीजेपी ने 23 महिलाओं को अपना उम्मीदवार बनाया था। इनमें से कांग्रेस की 11 और बीजेपी की 10 उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है।

राज्य में 199 सीटों के लिए हुए चुनाव में 187 महिला प्रत्याशियों ने चुनावी समर में अपना भाग्य आजमाया लेकिन इनमें से सिर्फ 22 महिलाओं ने जीत हासिल की जो पिछले चुनाव से छह कम है। वहीं 2013 के चुनाव में 166 महिलाओं में से 28 महिलाओं ने जीत दर्ज की थी।

कांग्रेस ने कुल 27 महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा था। अलवर जिले की रामगढ़ सीट पर प्रत्याशी के निधन के कारण चुनाव स्थगित किया गया है, जहां कांग्रेस की महिला प्रत्याशी थी। इस कारण कांग्रेस की 26 महिला प्रत्याशियों में से 11 महिलाएं जीत का परचम फहरा सकीं।

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पहली बार मेडता से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की महिला उम्मीदवार इंद्रा देवी चुनी गई हैं। बीजेपी की बात करें तो झालरापाटन से वसुंधरा राजे, अजमेर उत्तर से अनिता भदेल, अनूपगढ से संतोष बावरी, बीकानेर पूर्व से सिद्धि कुमारी, धौलपुर से शोभारानी कुशवाह, केशोरायपाटन से चंद्र कांता मेघवाल, लाडपुरा से कल्पना देवी, राजसमंद से किरण माहेश्वरी, सोजत से शोभा चौहान और सूरसागर से सूर्यकांता व्यास चुनी गई हैं।

कांग्रेस की बात करें तो बामनवास से इंद्रा मीणा, बगरू से गंगादेवी, बानसूर से शकुंतला रावत, जायल से मंजू देवी, जोधपुर से मनीषा पंवार, कामां से जाहिदा खान, किशनगंज से निर्मला सहरिया, ओसियां से दिव्या मदेरणा, सादुलपुर से कृष्णा पूनिया, शेरगढ़ से मीना कंवर और सिकराय से ममता भूपेश चुनी गई हैं।