मिजोरम विधानसभा चुनाव : प्रचार अभियान ने पकड़ा जोर, ऐसे हो रही मतदाताओं को रिझाने की कोशिश 

प्रतीकात्मक तस्वीर - Sakshi Samachar

आइजोल : मिजोरम की 40 सदस्यीय विधानसभा के लिये 28 नवंबर को होने वाले मतदान के लिये चुनाव प्रचार ने जोर पकड़ लिया है। उम्मीदवार चर्च समर्थित चुनाव निगरानी संस्था की देखरेख में मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। मिजोरम पूर्वोत्तर का एकमात्र राज्य है, जहां कांग्रेस सत्ता में है।

भाजपा ईसाइयों के वर्चस्व वाले इस राज्य में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। मिजोरम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेता लालहरूआइतलुआंगा कावलिनी ने कहा कि मिजोरम पीपुल्स फोरम (एमपीएफ) की करीबी निगरानी में जनसभा और गांवों में घर-घर जाकर प्रचार किया जा रहा है। एमपीएफ चर्च प्रायोजित चुनाव निगरानी संस्था है।

साल 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव में प्रचार का मानक तरीका यह था कि एक साझा मंच पर आकर क्षेत्र के सभी उम्मीदवार अपना-अपना प्रचार करते थे। हालांकि, इस बार एमपीएफ ने दिशा-निर्देशों में ढील दी है और साझा मंच को छोड़ दिया है। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ विचार-विमर्श के बाद एमपीएफ ने उम्मीदवारों के घर-घर जाकर प्रचार करने पर सहमति जता दी है। हालांकि, घर-घर जाकर प्रचार करने के दौरान उम्मीदवारों के साथ एमपीएफ की स्थानीय इकाई के नेता भी रहेंगे ताकि इस बात को सुनिश्चित किया जा सके कि वे धनबल का इस्तेमाल नहीं करें।

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मेघालय कांग्रेस के नेता ने कहा कि एमपीएफ नेता उम्मीदवारों द्वारा संबोधित जनसभा की अध्यक्षता भी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘चुनाव पर्यवेक्षक, खासतौर पर निगरानी दल के कर्मी कड़ी नजर रख रहे हैं और वाहनों की जांच कर रहे हैं।''

एमपीएफ और उड़न दस्ते की निगरानी में राजनीतिक दलों के झंडे और पोस्टरों के इस्तेमाल को भी कमतर कर दिया गया है। विपक्षी मिजो नेशनल फ्रंट के सचिव (एमएनएफ) के सचिव लालेनमाविया जोंगटे ने कहा कि फ्रंट ने कुछ गांवों को छोड़कर जनसभा का आयोजन नहीं किया।

जोंगटे ने कहा, ‘‘हमने पार्टी का प्रखंड सम्मेलन और इकाइयों की बैठक बुलाई, जहां उम्मीदवारों और स्टार प्रचारकों या पार्टी नेताओं ने मतदाताओं का समर्थन हासिल करने के लिये भाषण दिया।''

सभी गांवों में घर-घर जाकर प्रचार एमपीएफ की निगरानी में किया जा रहा है और चुनाव निगरानी संस्था भोज का आयोजन करने को लेकर बेहद कड़ा रुख अपना रही है। जोंगटे ने कहा कि एमपीएफ ने सामुदायिक दावत पर प्रतिबंध लगा दिया है और जो भी राजनीतिक दल अपने प्रचार अभियान के तहत इस तरह की दावत दे रहे हैं उनकी सार्वजनिक निंदा की जा रही है।

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