जयपुर : पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में सबसे दिलचस्प मुकाबला राजस्थान का माना जा रहा है। यहां कांग्रेस-भाजपा के बीच सीधा मुकाबला तो है ही, पार्टियों के अंदर भी कई जोर-आजमाइश देखी जा रही है।

खासकर कांग्रेस में सचिन पायलट और अशोक गहलोत पर खुद आलाकमान भी सोचने को मजबूर है। लेकिन, पिछले दिनों कुछ मीडिया रिपोर्ट्स पर ध्यान दें तो कहीं न कहीं सचिन पायलट अशोक गहलोत पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं।

भाजपा में मुख्यमंत्री उम्मीदवार के तौर पर सीएम वसुंधरा राजे पर कोई संशय नहीं है, जबकि कांग्रेस ने अभी तक किसी को सीएम उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। सचिन पायलट और अशोक गहलोत गुट अपने-अपने दावे कर रहे हैं।

क्या कांग्रेस को मिलेगा इसका फायदा

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस इस संशय का भी फायदा उठाना चाहती है। क्योंकि सचिन पायलट को पसंद करने वाला एक वर्ग विशेष है, जबकि अशोक गहलोत की लोकप्रियता का पैमाना दूसरा है। ऐसे में कांग्रेस जनता को यह बताकर कि कौन सीएम उम्मीदवार है, अपने पैर पर कुल्हाड़ी नहीं मारेगी।

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गहलोत पर भारी पायलट

राजस्थान के राजनीतिक समीकरण को देखा जाए तो कांग्रेस में कहीं न कहीं दो गुट नजर आ रहे हैं। इन सब के बीच चर्चा इस बात की है कि आखिर कौन, किस पर भारी। जानकारों की मानें तो अशोक गहलोत के मुकाबले सचिन पायलट को लोग ज्यादा पसंद कर रहे हैं और उन्हें सीएम उम्मीदवार के तौर पर देखना चाहते हैं। पिछले कुछ सर्वे के अनुसार, राजस्थान में न सिर्फ अशोक गहलोत बल्कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से भी ज्यादा सचिन पायलट लोकप्रिय हैं। खासकर युवा उनसे जुड़ा हुआ है।

पायलट की 4 साल की तपस्या

ऐसा नहीं है कि सचिन पायलट ने यह सब रातों-रात कर दिया है। उन्होंने पिछले चार साल जनता के बीच पार्टी को खड़ा करने में लगाया है। इसके अलावा उन्होंने पूरे साल यात्रा की और दूर-दराज के गांवों में गए। इससे उन पर 'दिल्ली वाले नेता' का लगा ठप्पा हट गया और जनता उनसे जुड़ सकी।