इंदौर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डेढ़ घंटे के इंदौर प्रवास के दौरान पुलिस बल ने सुरक्षा का नया तरीका इजाद किया। आयोजन स्थल पर किसी तरह की भ्रम और श्रद्धालुओं के बीच कोई गलत संदेश न जाए, इसको ध्यान में रखते हुए सुरक्षा बल के जवानों को खाकी वर्दी नहीं, बल्कि खादी के कुर्ता-पायजामा में तैनात किया गया।

इंदौर की सैफी मस्जिद में दाऊदी बोहरा समुदाय के धर्मगुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन की मौजूदगी में आयोजित 'आशरा मुबारक' कार्यक्रम में हिस्सा लेने शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी यहां पहुंचे। सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम थे, लगभग 4000 पुलिस जवानों को यहां तैनात किया गया था। SPG के कमांडो हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

सुरक्षा के मद्देनजर सैफी नगर के जिन मार्गो से प्रधानमंत्री को होकर गुजरना था, वहां के हर आवास के बाहर पुलिस जवानों का पहरा रहा, कोई अपने आवास के दरवाजे तक नहीं खोल पाया। किसी भी सामान्य जन को सड़क या आवास के बाहर खड़े होने की अनुमति नहीं थी, इतना ही नहीं, कोई भी छतों पर नजर नहीं आया।

सुरक्षा के लिए डोन कैमरे और CCTV कैमरों का भी सहारा लिया गया और आयोजन स्थल पर आने वाले हर व्यक्ति की पूरी तरह जांच-पड़ताल की गई, उसके बाद ही उसे सैफी नगर में प्रवेश मिल सका।

पुलिस ने सुरक्षा को लेकर खास एहतियात बरती। आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं के बीच पुलिस जवानों को भी बैठाया गया, यह जवान खाकी वर्दी में नहीं थे, बल्कि वे कुर्ता-पायजामा पहने हुए थे। उनकी बांह पर जरूरी पुलिस लिखा हुआ था। लगभग 200 जवानों को खादी के कुर्ता-पायजामा में तैनात किया गया था।

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इंदौर के पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG) हरि नारायण चारी मिश्रा ने बताया है कि पुलिस जवानों को सफेद कुर्ता-पायजामा में तैनात किए जाने की खास वजह थी, इस आयोजन में हिस्सा लेने वाले धर्मावलंबी कुर्ता पायजामा में थे और पुलिस जवान भी इसी ड्रेस में। इससे किसी को असुविधा या भ्रम नहीं हुआ। अगर जवान खाकी वर्दी में श्रद्धालुओं के बीच बैठते तो यह अच्छा नहीं होता, पुलिस जवान श्रद्धालुओं के बीच अलग नजर आते।

सूत्रों का कहना है कि पुलिस जवानों को यह कुर्ता-पायजामा आयोजकों की ओर से दिए गए थे। कार्यक्रम खत्म होते ही जवानों ने आयोजन समिति को कुर्ता-पायजामा लौटा दिए। ये सभी जवान अपनी खाकी वर्दी के ऊपर खादी के कुर्ता-पायजामा पहने हुए थे।

राज्य में संभवत: इस तरह का प्रयोग पहली बार किया गया, जब किसी धार्मिक आयोजन में पुलिस जवानों को खाकी की बजाय खादी के कुर्ता-पायजामा पहनाकर तैनात किया गया। आमतौर पर गुप्तचर एजेंसी और SPG के कमांडो सफारी सूट पहनते हैं, मगर सुरक्षा के लिए यह प्रयोग मध्यप्रदेश के लिए नया है।