टाइटिल : सैरा

जॉनर : पीरियॉडिक मूवी

कलाकार : चिरंजीवी, अमिताभ बच्चन, किच्चा सुदीप, विजय सेतुपति, जगपति बाबू, नयनतारा, तमन्ना व अन्य

संगीत : अमित त्रिवेदी

निर्माता : राम चरण

निर्देशन : सुरेंदर रेड्डी

रेनाटी के योद्धा... प्रथम स्वतंत्रता सेनानी उय्यालवाड़ा नरसिम्हा रेड्डी की भूमिका में मेगास्टार चिरंजीवी अभिनीत 'सैरा' फिल्म को लेकर उम्मीदें सातवें आसमान पर हैं। अभिनेता रामचरण द्वारा निर्मित यह फिल्म दर्शकों के सामने आ चुकी है। तो अब हम देखेंगे कि क्या 'सैरा दर्शकों का दिल जीतने में कामयाब हुई भी है या नहीं ?...

कहानी :

सभी जानते हैं कि सैरा नरसिम्हा रेड्डी कोई नई कहानी नहीं है, क्योंकि अभी तक सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी पर आधारित कहानियों को हम पर्दे पर देख चुके हैं। परंतु सर्व प्रथम स्वतंत्रता सेनानी और रेनाटी के योद्धा नरसिम्हा रेड्डी के बारे में अभी तक दुनिया उतना नहीं जानती। यही इस फिल्म के लिए नया और प्लस प्वाइंट है जो हमें फिल्म देखने के लिए मजबूर कर देता है।

नरसिम्हा रेड्डी 61 छोटे-छोटे राजाओं को एकजुट कर अंग्रेज साम्राज्य के खिलाफ जाने का प्रयास करता है। इस कहानी में सिद्दम्मा, लक्ष्मी की भूमिका क्या है? स्वतंत्रता संग्राम के लिए नरसिम्हा रेड्डी आखिर कितने लोगों को एक मंच पर लेकर आया ? इसी क्रम में उसे किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा था? यही फिल्म की बाकी कहानी है।

फिल्म में चिरंजीवी के साथ अमिताभ बच्चन 
फिल्म में चिरंजीवी के साथ अमिताभ बच्चन 

कलाकार :

'सैरा' में मेगास्टार चिरंजीवी उय्यालवाड़ा नरसिम्हा रेड्डी के रूप में जंच रहे हैं। इमेज से छेड़छाड़ किए बगैर उनकी भूमिका में जो गंभीरता है उसे मिस किए बिना चिरंजीवी ने अपने जबरदस्त अभिनय का परिचय दिया है। एक्शन सीन्स में तो मेगास्टार ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है। फिल्म कई दिग्गज एक्टरों से भरी होने और हर सीन काफी अच्छा होने के बाद भी सभी की आंखें नरसिम्हा रेड्डी को ही ढूंढती दिखती है।

पूरी फिल्म को चिरंजीवी ने अपने कंधों पर लिया है। मुख्य रूप से इंटरवेल में आने वाले सीन्स और चिरंजीवी का एक्शन वाकई काबिले तारीफ है। बहुत ही कठिन सीन्स को चिरंजीवी आसानी से करते दिखे हैं। खास करके क्लाइमैक्स से फिल्म की रूपरेखा ही बदल जाती है और यह हर सिर उठाकर देखने वाला सीन है। यह मृत्यु नहीं बल्कि जन्म...जैसे चिरंजीवी के डायलॉगों से लोगों के रौंगटें खड़े हो जाते हैं। चिरंजीवी के बाद अगर फिल्म में किसी का किरदार है तो वह है आवुकु के राजा किच्चा सुदीप का है।

फिल्म का पोस्टर 
फिल्म का पोस्टर 

डायरेक्टर ने विभिन्न कोणों को दिखाते हुए जरूरत वाली जगहों पर दर्शकों को सरप्राइज दिया है। गुरु की भूमिका में गोसाई वेंकन्ना के रूप में अमिताभ गेस्ट अपीयरेन्स में है। अमिताभ बच्चन फिल्म में बहुत कम समय के लिए हैं, लेकिन उतने में ही उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी है। वीरा रेड्डी के रूप में जगपति बाबू की एक्टिंग तारीफे काबिल है।

क्लाइमैक्स में जगपति बाबू की एक्टिंग देखकर दर्शकों की आंखें नम हो जाती हैं। विजय सेतुपति की भूमिका सीमित है, लेकिन उन्होंने भी राजा पांडी के किरदार में काफी अच्छा काम किया है। सिद्धम्मा के किरदार में नयनतारा नजर आईं है और पूरी फिल्म में पांच-छह बार ही नजर आती है, परंतु लक्ष्मी की भूमिका में तमन्ना भाटिया सभी का दिल जीतने में कामयाब दिखी है। उनकी भूमिका खत्म होने के साथ ही फिल्म में नया ट्विस्ट आ जाता है। रवि किशन, ब्रह्माजी, अनुष्का आदि कलाकारों ने अपनी-अपनी भूमिका बखूबी निभाई हैं।

विश्लेषण :

सभी को पता रहने वाली कहानी को दर्शक पसंद करें और उसकी तारीफ करने लायक प्रदर्शित करने में ही निर्देशक की प्रतिभा दिखती है। ऐसे भी इतिहास में कभी नहीं सुनने वाली नरसिम्हा रेड्डी की कहानी को निर्देशक ने कुछ इस तरह पेश किया है कि आज की पीढ़ी उसे पसंद कर सके।

फिल्म का पोस्टर
फिल्म का पोस्टर

नरसिम्हा रेड्डी के बारे में बताने के लिए निर्देशक ने अंग्रेजों की ज्यादतियों, अराजकता तथा उस समय के लोगों की परिस्थितियों से अवगत कराने में फिल्म का फर्स्ट हॉफ का इस्तेमाल किया है। निर्देशन काफी अच्छा है और हर कैरेक्टर को एलिवेट करने लायक फिल्माया गया है। साथ ही हर सीन दर्शकों के साथ कनेक्ट हो, ऐसा डिजाइन किया है। इस कहानी को दर्शाने के लिए निर्देशक द्वारा चुने गये स्क्रीन प्ले को काफी सराहा जा रहा है। शुरू से लेकर आखिर तक दर्शकों को कहीं भी बोरियत महसूस नहीं होती। यही इस फिल्म का प्लस प्वॉइंट है।

फिल्म का पोस्टर
फिल्म का पोस्टर

साई माधव बुर्रा ने द्वेष के लिए नहीं देश के लिए खड़े होने जैसे अद्भुत और अर्थयुक्त डॉयलॉग लिखे हैं। फिल्म का एक और प्लस प्वाइंट उसका संगीत है। अमित त्रिवेदी द्वारा धुनों से पिरोए गए गाने फिल्म को दूसरे लेवल पर ले जाते हैं। फिल्म में दो ही गाने हैं, लेकिन उन्हें फिल्माने के तरीके पर लोगों का फिदा होना लाजमी है। पर्दे पर अगर सैरा कैरेक्टर इतना एलिवेट होने के पीछे सिर्फ रत्नवेलु की मेहनत है। अपने पिता की इच्छा को पूरा करने के लिए रामचरण ने जो मेहनत और पैसा खर्च किया है, वह पर्दे पर साफ दिखता है।

फिल्म का पोस्टर
फिल्म का पोस्टर

चिरंजीवी की ड्रीम प्रोजेक्ट बताई जाने वाली इस सैरा को विजुअल वंडर के रूप में पर्दे पर उतार कर राम चरण ने अपने पिता को इनाम स्वरूप दिया है। फिल्म के निर्माण में कहीं भी किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया है और उसके अनुरूप परिणाम भी पर्दे पर दिख रहा है। एडिटिंग, कॉस्ट्यूम,. आर्ट इस तरह सभी विभाग फिल्म को सफल बनाने में सहयोगी साबित हुए हैं।