सिद्धार्थ और परिणीति की खूब जमी जबरिया जोड़ी 

जबरिया जोड़ी  - Sakshi Samachar

फिल्म : जबरिया जोड़ी

कलाकार : सिद्धार्थ मल्होत्रा, परिणीति चोपड़ा, जावेद जाफरी, संजय मिश्रा

निर्देशक : प्रशांत सिंह

संगीत : तनिष्क बागची, विशाल मिश्रा, संचेत परंपरा

बिहार में लड़कों का अपहरण करके जबरदस्ती शादी करवाने की कुप्रथा है। इस कुप्रथा के बारे में यूं सफाई दी जाती है कि दहेज प्रथा को खत्म करने के लिए यह जबरिया विवाह करवाया जाता है।

इस तरह की शादी में बाहुबलियों को पैसे देकर लड़कों का अपहरण करवाया जाता है फिर जबरन शादी करवाई जाती है। फिल्म जबरिया जोड़ी में इसी तरह की कहानी को बड़े ही रोचक तरीके से हल्के-फुल्के अंदाज में पेश किया गया है।

निर्देशक प्रशांत सिंह ने काफी कोशिश की फिल्म को दिलचस्प बनाने की, कुछ हिस्सों में वे दर्शकों को हंसाने व गुदगुदाने के साथ ही कुछ मुद्दों पर समझाने में कामयाब भी हुए। लेकिन कमजोर पटकथा ने बात बिगाड़कर रख दी।

जबरिया जोड़ी में सिद्धार्थ मल्होत्रा व परिणीति चोपड़ा 

कहानी

फिल्म की कहानी शुरू होती है बिहार के एक गांव से। बिहार के एक दबंग हुकुम सिंह (जावेद जाफरी) जबरिया जोड़ी का माफिया चलाते हैं। उनके मुताबिक यह एक समाज सेवा है जिससे दहेज से बचा जा सकता है। उसके इसी धंधे में ना चाहते हुए भी उसका बेटा अभय सिंह (सिद्धार्थ मल्होत्रा) भी आता है।

दूसरी तरफ बबली यादव (परिणीति चोपड़ा) जो एक मध्यम वर्गीय परिवार की बेटी है मगर स्वभाव से दबंग है। इन दोनों की मुलाकात एक शादी के दौरान होती है और बबली अभय की तरफ आकर्षित हो जाती है। दोनों को पता चलता है कि वे एक दूसरे को बचपन से चाहते थे मगर बबली के पिता के शहर छोड़ने के बाद वो जुदा हो गए। इन दोनों के प्यार, इकरार और तकरार पर जबरिया जोड़ी आधारित है। फिल्म में रोमांस, कॉमेडी, समाज को शिक्षा सब कुछ मिल जाता है।

अभिनय

फिल्म में अभिनय की बात की जाए तो अभय सिंह के किरदार में सिद्धार्थ मल्होत्रा पूरे दमखम के साथ दिखे हैं। सिद्धार्थ ने बिहारी रंग ढ़ंग में ढ़लने की सौ प्रतिशत कोशिश की है और उनका प्रयास दिखता है। एक लंबे समय के बाद सिद्धार्थ में खास विश्वास दिखा है। वहीं, पहनावे से लेकर बोलने के अंदाज तक, परिणीति की ओर से निराशा हाथ लगती है।

सर्पोटिंग कास्ट के मामले में फिल्म काफी सशक्त है। बबली से एकतरफा प्यार करने वाले दोस्त के किरदार में अपारशक्ति खुराना ने एक बार फिर जता दिया है कि वह छोटे- बड़े किसी भी रोल को पूरी शिद्दत के साथ निभाते हैं।

निर्देशक उन्हें स्क्रिप्ट में और भी जगह दे सकते थे। बबली यादव के पिता के किरदार संजय मिश्रा, हुकुम देव सिंह बने जावेद जाफरी, अभय सिंह की मां के किरदार में शीबा चड्डा प्रभावी रहे हैं।

निर्देशन

प्रशांत सिंह का निर्देशन औसत रहा है। फिल्म का फर्स्ट हॉफ काफी हंसाता है और किरदार आपको बांधे रखते हैं। इंटरवल के बाद फिल्म में एक थकावट सी आ जाती है। संजीव झा का लेखन फिल्म को बोझिल बनाता दिखता है। फिल्म के क्लाईमैक्स तक जाते-जाते निर्देशक संवाद का स्तर भी गिराते जाते हैं।

इसे भी पढ़ें :

तेलुगु फिल्म ‘मन्मथुडु 2’ की समीक्षा

बता दें, संजीव झा खुद भी बिहार से ताल्लुक रखते हैं, ऐसे में कहानी में थोड़ी और रियल अप्रोच की उम्मीद की जा रही थी। हालांकि फिल्म के कलाकार कहीं ना कहीं एक डोर थामे रखते हैं, जिससे दर्शक कहानी से जुड़े रहेंगे।

जबरिया जोड़ी में सिद्धार्थ मल्होत्रा व परिणीति चोपड़ा 

कुल मिलाकर सिद्धार्थ- परिणीति की 'जबरिया जोड़ी' इंटरटेनमेंट के तौर पर वन टाइम वाच यानी एक बार देखी जाने वाली फिल्म है। फिल्म मजबूती के साथ शुरू होती है लेकिन मध्यांतर के बाद ओवर ड्रामा में फंसकर रह जाती है।

छोटे शहरों में फिल्म अच्छी कमाई कर सकती है। बिहार में फिल्म लोगों को प्रभावित कर पाएगी, इसमें संदेह है। कुल मिलाकर जबरिया जोड़ी एक सामान्य फिल्म है जो शायद छोटे सेंटर्स पर दर्शकों को रास आये।

Advertisement
Back to Top