दीवानगी से लवरेज प्रेम कहानी और शाहिद की दमदार एक्टिंग के लिए देखिए ‘कबीर सिंह’

फिल्म का पोस्टर  - Sakshi Samachar

मुंबई : बॉलीवुड के फाइनेस्ट एक्टर शाहिद कपूर की फिल्म ‘कबीर सिंह’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। इस फिल्म को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह नजर आ रहा है। रोमांटिक ड्रामा और दीवानगी भरी प्रेम कहानियों के शौकीन दर्शक इस फिल्म को लेकर काफी क्रेजी नजर आ रहे हैं। शहीद कपूर की जबरदस्त एक्टिंग के लिए यह फिल्म देखी जा सकती है ।

बॉलीवुड के फाइनेस्ट एक्टर शाहिद कपूर की फिल्म ‘कबीर सिंह’ टॉलीवुड के फिल्म निर्देशक संदीप वंगा रेड्डी द्वारा निर्देशित फिल्म ‘अर्जुन रेड्डी’ की रीमेक है। कबीर सिंह में शाहिद का काम अब तक का बेस्ट काम कहा जा सकता है।

संदीप वंगा रेड्डी ने ही इस फिल्म का निर्देशन किया है क्योंकि कबीर सिंह का टेस्ट परदे पर कोई और प्रस्तुत कर ही नहीं सकता था। ख़ासकर दिल टूटने वाले सीन को जिस तरह उन्होंने लिखा है उसकी कारीगरी परदे पर साफ़ नज़र आती है। सिनेमाहॉल में आपके तीन घंटे कैसे बीत जाते हैं आपको पता ही नहीं चलता है।

कबीर सिंह के रोल में शाहिद कपूर ने जो ऐक्टिंग की है, इसे उनका अब तक का बेस्ट काम कहा जा सकता है। इससे पहले लगता था कि शाहिद कपूर का काम ‘हैदर’ में सबसे अच्छा है लेकिन ‘कबीर सिंह’ देखने के बाद आपकी राय बदल सकती है। कबीर के ग़ुस्से को, प्यार को और जुनून को शाहिद ने जिस तरह परदे पर जिया है शायद और कोई ये स्वैग परदे पर नहीं ला सकता था।

कियारा आडवाणी भी प्रीति के रोल में सूट कर रही हैं फ़िल्म में उनके डायलॉग्स बहुत कम हैं, लेकिन कियारा ने बिना बोले ही प्रीति के किरदार को बख़ूबी निभाया है। जब भी वो सक्रीन पर नजर आती हैं तब वो अपनी मासूमियत से वो आपका दिल जीत लेंगी। कबीर सिंह के भाई करन के रोल में अर्जन बाजवा ने भी काफी अच्छा काम किया है।

कबीर सिंह की जिंदगी में जितने भी लोग हैं चाहें वो उसकी माँ, पिता (सुरेश ओबेरॉय) या फिर कबीर की दादी उसके दोस्त हर किरदार आपको सच्चा लगेगा, सबने अपने-अपने रोल में मतलब भर की मेहनत की है और इसका सारा क्रेडिट संदीप को जाता है।

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संदीप ने छोटी से छोटी चीज़ों का ध्यान रखा है, बॉलीवुड में शायद आपने ऐसी लव स्टोरी पहले नहीं देखी होगी। फ़िल्म के क्लाइमैक्स से पहले एक सीन आता है जहाँ कबीर अपने पिता से बात करता है ये सीन कबीर के किरदार को नए तरीक़े से एक्सप्लेन करता है।

यहाँ आपको समझ आता है कि लाइफ़ को लेकर कबीर का नजरिया क्या है। कबीर को इतना ग़ुस्सा आता है और ग़ुस्से में वो कुछ भी बोल देता है लेकिन फिर भी उसे देखकर लगता है कि ये बिलकुल हम जैसा है, हर किसी की ज़िंदगी में ऐसा दौर आता है, कबीर सिंह की कहानी उसी दौर की है।

अब जरा इस बात पर चर्चा कर लेते हैं कि फिल्म 'अर्जुन रेड्डी' से कितनी अलग है कबीर सिंह। आपको बता दें कि ये फ़िल्म 'अर्जुन रेड्डी' बिल्कुल भी अलग नहीं है, सीन टू सीन और डायलॉग टू डायलॉग फ़िल्म बिल्कुल अर्जुन रेड्डी जैसी ही है। कहीं कोई बदलाव नहीं किया गया है बदला है तो सिर्फ़ किरदारों का चेहरा और लोकेशन।

हां इस फ़िल्म में आप शाहिद को जानते हैं इसलिए बीच-बीच में आपको याद आ जाता है कि ये शाहिद हैं लेकिन अर्जुन रेड्डी में विजय देवरकोंडा नए थे और दुनिया के लिए वो उस वक़्त सिर्फ़ अर्जुन रेड्डी थे। इसके अलावा फ़िल्म में कोई बदलाव नहीं है।

साक्षी समाचार इस फ़िल्म को 5 में से 3.5 स्टार देता है।

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