टाइटल : ABCD (अमेरिकन बर्न कनफ्यूजड् देसी)

जॉनर : कॉमेडी एंटरटाइनर

कलाकार : अल्लू शिरीश, रुक्सर ढिल्लों, भरत, राजा, नागबाबू

संगीत : जुड़ा सांडी

निर्देशन : संजीव रेड्डी

निर्माता : मथुरा श्रीधर, यश रंगीनेनी

मेगा फैमिली से फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री दे चुके अल्लू शिरीश खुद को बतौर हीरो प्रूव साबित करने की कोशिश में लगे हैं। तेलुगु में चार फिल्में रिलीज होने के बावजूद उन्हें एक भी फिल्म स्टार इमेज लेकर नहीँ आई है। मलयालम में सक्सेस साबित हुई फिल्म ABCD को तेलुगु में उसी नाम से रिमेक किया गया है। अल्लू शिरीश को इस बात का विश्वास है कि फिल्म की कहानी उनकी उम्र और बॉडी लांग्वेज के अनुरूप है। तो क्या यह फिल्म अल्लू शिरीश को सुपरहिट साबित होगी ?

फिल्म का एक सीन 
फिल्म का एक सीन 

कहानी :

अरविंद प्रसाद (अल्लू शिरीश) उर्फ अवि... न्यूयार्क में सेटल हुए इंडियन मिलियनीर विद्या प्रसाद (नागबाबू) का बेटा है। अपनी बुआ के बेटे बाशा उर्फ बालषणमुगम (भरत) के साथ मौज-मस्ती का लाइफ बिताता है। दोनों हर महीने 20 हजार डालर खर्च करते हुए बगैर किसी जिम्मेदारी के लाइफ एंजाय करते हैं। अपने बेटे को पैसे और जिन्दगी की कीमत का अहसास कराने का मन बना चुका विद्या प्रसाद वोकेशन के नाम पर अवि और बाशा को इंडिया भेज देता है।

फिल्म का एक सीन 
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विद्या प्रसाद इंडिया पहुंचे अवि और बाशा को हर महीने 5000 रुपये ही खर्च करते हुए एमबीए पूरी करने के लिए कहता है। इससे अनिवार्य परिस्थितियों में हैदराबाद में रहने को मजबूर अवि का स्थानीय पॉलिटिशन भार्गव के साथ झगड़ा होता है। अवि और भार्गव के बीच झगड़े की वजह क्या है..? अमेरिका में पले बढ़े अवि और बाशा इंडिया में कैसे एडजस्ट हो पाए...? एक सामान्य युवक के रूप में इंडिया में कदम रखने वाले अवि सेलिब्रिटी और यूथ आइकॉन कैसे बना...? यही फिल्म की बाकी कहानी है

कलाकार :

अल्लू शिरीश ने अपनी पिछली फिल्मों की तुलना में इस फिल्म में काफी अच्छा काम किया है। बगैर किसी रेस्पान्सिबिलिटी के लाइफ एंजाय करने वाले युवक की किरदार में बिलकुल फिट हुए हैं। प्री क्लाइमैक्स, क्लाइमैक्स में आने वाले इमोशनल सीन्स में काफी अच्छी एक्टिंग की है। बाल अभिनेता के रूप में टॉलीवुड में करियार की शुरूआत करने वाले भरत इस फिल्म के साथ कैरेक्टर आर्टिस्ट के किरदार में हैं और उन्होंने अपने किरदार के साथ पूरा इंसाफ किया है।

फिल्म का एक सीन 
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अभिनेत्री रुक्सर ढिल्लों को एक्टिंग का ज्यादा मौका नहीं मिला है, लेकिन लुक्स की बात करें, तो उन्हें अच्छे नंबर मिले हैं। हीरो के पिता की भूमिका में नागबाबू बिलकुल सूट हुए हैं। विलन की किरदार में राजा की एक्टिंग ठीक है। अन्य किरदारों में वेन्नेला किशोर, शुभलेख सुधाकर, कोटा श्रीनिवास राव ने अपना-अपना किरदार बखूभी निभाया है।

विश्लेषण :

निर्देशक संजीव रेड्डी ने मलयालम में सुपरहिट रही फिल्म एबीसीडी में तेलुगु नेटिविटी के अनुरूप थोड़ा-बहुत बदलाव के साथ रिमेक किया है। कहानी ठीक-ठाक है, लेकिन उसमें कुछ मिस होने की फीलिंग जरूर होती है। एक्शन सीन्स नहीं है। इंडिया आने के बाद हीरो की चुनौतियों के दृश्यों में और कॉमेडी व इमोशन्स दिखाने का मौका था, लेकिन निर्देशक ने फिल्म को सीधा-साधा ही आगे बढ़ाया। कहानी में भी स्ट्रॉंग कानफ्लिक्ट नहीं होना भी माइनस प्वाइंट है।

फिल्म का एक सीन 
फिल्म का एक सीन 

जुड़ा सांडी का संगीता काफी अच्छा है। फिल्म का गाना मेल्ला मेल्ला मेल्ला मेल्लगा का म्यूजिक काफी अच्छा है। सिनमेटोग्राफी सिनेमा के लिए प्लस प्वाइंट है। अमेरिका में शूट किए गए सीन्स के साथ हैदराबाद के स्टम में फिल्माए गए सीन्स को कलरफुल अंदाज में कैमरे में कैद किए गए हैं। सिनमेटोग्रफर राम, एडिटिंग और निर्माण भी फिल्म के स्तर के अनुरूप है।

प्लस प्वाइंट्स :

कहानी

कुछ कॉमेडी सीन्स

माइनस प्वाइंट्स

कॉमेडी का वर्कआउट न होना

स्ट्रॉंग सीन्स का ना होना