फिल्म टाइटिल : यूटर्न

जॉनर : सुपर नैचुरल थ्रिलर

किरदार : समंता, आदि पिनीशेट्टी, भूमिका चावला, राहुल रविचंद्रन, नरेन

संगीत : पूर्णचंद्रा तेजस्वी

निर्देशक : पवन कुमार

निर्माता : श्रीनिवासा चिट्टूरी, रामबाबू बंडारु

शादी के बाद फिल्में चुनने में अभिनेत्री समंता काफी सेलेक्टिव हो गई है। वह अभिनय के अधिक अवसर वाली फिल्में ही चुन रही हैं। इस साल अब तक 'रंगस्थलम' और 'अभिमन्युडु' जैसी सुपर हिट फिल्में अपनी झोली में डाल चुकी समंता की नजर अब एक और सुपरहिट फिल्म पर पड़ी है।

इसीलिए उन्होंने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा चुकी कन्नड़ फिल्म 'यू टर्न' को उसी नाम से तेलुगु में रिमेक किया है। लेडी ओरिएंडेट फिल्म के तौर पर पर्दे पर आई यू टर्न के ओरिजनल वर्शन का निर्देशन कर चुके पवन कुमार ने ही रिमेका का निर्देशन किया है।

फिल्म के एक दृश्य में समंता 
फिल्म के एक दृश्य में समंता 

सुपर नैचुरल थ्रिलर के रूप में दर्शकों के सामने आई यू टर्न से समंता को क्या आपक्षित सफलता मिली...? क्या उन्होंने लेडी ओरिएंटेड फिल्म से लोगों का दिल जीता है? क्या कन्नड़ दर्शकों को मनोरंजित कर चुकी यू टर्न अब तेलुगु दर्शकों को भी लुभा सकेगी?

कहानी :

रचना (समंता) एक मीडिया कंपनी में इंटर्नशिप करती है। वह उसी कंपनी में नौकरी के लिए एक ह्यूमन इंट्रेस्ट स्टोरी बनाने का प्लान बनाती है और उसके लिए आरके पुरम फ्लाईओवर पर बने रोड ब्लॉक्स हटाकर यू टर्न लेने वालों पर एक स्टोरी बनाने की सोच के साथ वहां 'यू टर्न' लेने वाले वाहनों के नंबरों के जरिए उनके मालिका के पते और फोन नंबर की जानकारी हासिल करती है।

फिल्म के एक दृश्य में समंता 
फिल्म के एक दृश्य में समंता 

इसी दौरान सुंदर नामक व्यक्ति से मिलने की उसकी कोशिश विफल हो जाती है। लेकिन उसी दिन सुंदर आत्महत्या कर लेता है और पूछताछ के लिए पुलिस रचना को थाने ले जाती है। पूछताछ के दौरान रचना की डायरी की जांच करने पर पुलिस को हैरान कर देने वाले विषयों का पता चलता है।

उस डायरी में जितने लोगों के नाम होते हैं, वे सभी उससे पहले आत्महत्या कर चुके लोग होते हैं। आखिर उस डायरी में किन व्यक्तियों के नाम हैं? उनकी मौत कैसे होती है? उनकी मौत से रचना का क्या संबंध है ? इन समस्याओं से रचना किस तरह बाहर निकलती है...? यही है फिल्म की बाकी कहानी।

कलाकार :

अब तक कमर्शियल हिरोइन के रूप में मशहूर हुई समंता फिलहाल खुद को एक सुलझी हुई अभिनेत्री साबित करने की कोशिश कर रही हैं। यही वजह है वह अभिनय का अधिक मौके वाले किरदार ही चुन रही है। यू टर्न फिल्म को भी उन्होंने काफी सोचने के बाद सेलेक्ट किया है। समंता ने अपने परफार्मेन्स से इस फिल्म का स्तर बढ़ाया है। प्यार, डर, सेंटीमेंट इस तरह सभी एमोशन्स का सही मेल है

फिल्म के एक दृश्य में समंता 
फिल्म के एक दृश्य में समंता 

हालांकि डबिंग के मामले में और थोड़ा ध्यान देने की जरूरत थी। रचना की मदद करने वाले पुलिस अधिकारी के किरदार में आदि पिनीशेट्टी काफी फिट दिख रहे हैं। फिल्म में कुछ खास वेरिएशन दिखाने का मौका नहीं होने के बावजूद निर्देशक ने जितना मौका मिला है, उसे बखूबी निभाया है। अभिनेत्री भूमिका चावला का किरदार बहुत कम समय का है, लेकिन उन्होंने अपने किरदार के साथ पूरा इंसाफ किया है।

खास करके फिल्म के क्लाइमैक्स में भूमिका का अभिनय लोगों के आंसू छलकने पर मजबूर कर देता है। समंता के फ्रेंड की भूमिका में क्राइम रिपोर्टर के रूप में राहुल रविचंद्रन अपने किरदार के साथ पूरा इंसाफ किया है। अन्य भूमिकाओं में नरेन और रवि प्रकाश ने भी अपनी सीमा के मुताबिक परफार्मेन्स दिया है।

विश्लेषण :

थ्रिलर जॉनर में बनी फिल्मों को एक वर्ग के दर्शक अकसर पसंद करते हैं। यही वजह है टॉप स्टार्स भी कभी-कभी थ्रिलर फिल्मों में काम करते हैं। समंता ने भी खुद को एक मंझी हुई अभिनेत्री साबित करने की कोशिश के तहत ही कन्नड़ की सुपर हिट फिल्म को तेलुगु में रिमेंक किया है। ओरिजनल वर्शन का निर्देशन कर चुके पवन कुमार ने ही तेलुगु वर्शन को डायरेक्ट किया है।

फिल्म के एक दृश्य में समंता 
फिल्म के एक दृश्य में समंता 

शुरूआती 10 मिनट तक फिल्म बहुत ही धीमी गति से चलती है, लेकिन असली कहानी शुरू होते ही निर्देशक ने दर्शकों को आखिर तक बंधे रखने में कोई कसूर नहीं छोड़ी है। कहीं-कहीं अनावश्यक कॉमेडी और गानों से बचते हुए एक परफैक्ट थ्रिलर सिनेमा बनाने में कामयाब साबित

हुआ है निर्देशक। पूर्णचंद्र तेजस्वी का संगीत सीन्स को और एलिवेट किया है। साथ में बैकग्राउंड स्कोर ने भी फिल्म का कद बढ़ा दिया है। परंतु सेकेंड हॉफ में कुछ ट्विस्ट्स ऐसे हैं, जिन्हें दर्शक पहले ही भांक लेते हैं, जोकि किसी भी थ्रिलर फिल्मों के लिए ड्रॉबैक ही कहना होगा। सिनमेटोग्राफी, एडिटिंग और निर्माण कार्य फिल्म के मुताबिक है।

प्लस प्वाइंट्स :

समंता की दमदार एक्टिंग

बैकग्राउंड म्यूजिक

माइनस प्वाइंट्स :

पहले दस मिनट

सभी वर्गों के दर्शकों को खुश करने वाले मुद्दों का न होना