हमारे देश के खिलाड़ियों के जीवन पर लगातार फिल्में बनती रही हैं। अबकी बार देश के हॉकी के चैंपियन खिलाड़ी संदीप सिंह के जीवन पर बनी बायोपिक आ गयी है। कहा जा रहा है कि ‘सूरमा’ हॉकी के चैंपियन खिलाड़ी संदीप सिंह के जीवन से जुड़ी प्रेरणादायक कहानी पर आधारित है।

संदीप सिंह, हॉकी चैंपियन हैं जो कुछ साल पहले मौत के मुंह से जूझते हुए अपने जादुई कमबैक की वजह से चर्चा में आए थे। संदीप को डॉक्टरों ने जीवन भर के लिए हॉकी खेलने के लिए अयोग्य बता दिया और उसके बाद संदीप ने अपनी ज़िंदगी की नई कहानी, खुद लिखी थी जिसे शाद अली ने परदे पर उतारने की कोशिश की है।

फिल्म के बारे में कहा जा रहा है कि फिल्म के शुरुआती हिस्से में ही प्रीतो बनी तापसी पन्नू और संदीप सिंह के प्यार की कहानी है और प्रीतो को इंप्रेस करने के लिए उसके साथ हॉकी खेलता है। पर हॉकी में वह हार जाता है तब प्रीतो कहती है अगर लाइफ में गोल होगा तो यहां भी हो जाएगा..!

कहते हैं कि इसी एक लाइन पर पूरी फिल्म टिकी है और संदीप सिंह की ज़िंदगी में होने वाले उतार चढ़ाव को दिखाती है। एक निर्देशक के तौर पर शाद अली ने बखूबी तरीके से किरदार को उभारने की कोशिश की है।

वैसे इस फिल्म में एक जीत, ज़िद और जुनून की कहानी के साथ साथ एक प्यारी सी प्रेम कहानी है जो दर्शकों को बांधे रखती है। सूरमा की शुरूआत 1994 में शाहाबाद से होती है, जहां पर एक छोटा संदीप सिंह अपने सपने बुन रहा है और भारतीय हॉकी टीम में खलने की सोच रहा है।

कई उतार चढ़ाव के बाद संदीप फिर से हॉकी तब उठाता है जब उसका दिल आता है हरप्रीत (प्रीतो) को हॉकी खेलते हुए देखकर आता है। हरप्रीत एकबार फिर से संदीप के मन में हॉकी के लिए प्यार जगाती है। इसके बाद संदीप अपनी शानदार स्टाइल के लिए फ्लिकर सिंह बन जाता है।

इस फिल्म में संगीत की बात करें तो संगीतकार शंकर-एहसान-लॉय केवल दो गाने ही सुनने लायक बना सके हैं। बाकी सारे गाने व उनका संगीत सामान्य कहा जा सकता है। ‘सूरमा’ एक अच्छी फिल्म है।

अभिनय की बात की जाए तो दलजीत दोसांझ संदीप सिंह बनने में पूरी तरह से सफल रहे हैं। विक्रम बने अंगद बेदी एक अभिनेता के तौर पर अपनी छाप छोड़ जाते हैं। तापसी पन्नू एक समर्थ अभिनेत्री हैं और वह प्रीतो ही नज़र आई हैं। इसके अलावा अन्य कलाकार भी अपनी भूमिका बखूबी निभाए हैं।

कहानी व फिल्मांकन के आधार पर इसे सपरिवार देखी जाने वाली फिल्म कहा जा सकता है। फ़िल्म में मनोरंजन के साथ बच्चों के अंदर कुछ कर गुजरने का ज़ज्बा भरने वाली साबित हो सकती है।