मुंबई : घरेलू शेयर बाजारों में पिछले हफ्ते तेजी दर्ज की गई और साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 334.65 अंकों या 0.94 फीसदी की तेजी के साथ 36,076.72 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 105.90 अंकों या 0.98 फीसदी की तेजी के साथ 10,859.90 पर बंद हुआ।

सोमवार को नकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच शेयर बाजार की नरम शुरुआत हुई और सेंसेक्स 271.92 अंकों या 0.76 फीसदी की गिरावट के साथ 35,470.15 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 90.50 अंकों या 0.84 फीसदी की गिरावट के साथ 10,663.50 पर बंद हुआ। मंगलवार को क्रिसमस के अवसर पर शेयर बाजार बंद रहे।

बुधवार को शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर रहा और सेंसेक्स 234.51 अंकों या 0.66 फीसदी की तेजी के साथ 35,704.66 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 66.35 अंकों या 0.62 फीसदी की तेजी के साथ 10,729.85 पर बंद हुआ।

गुरुवार को सेंसेक्स 157.34 अंकों या 0.44 फीसदी की तेजी के साथ 35,807.28 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 49.95 अंकों या 0.47 फीसदी की तेजी के साथ 10,779.80 पर बंद हुआ।

शुक्रवार को भी बाजार में तेजी रही और सेंसेक्स 269.44 अंकों या 0.75 फीसदी की तेजी के साथ 36,076.72 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 80.10 अंकों या 0.74 फीसदी की तेजी के साथ 10,859.90 पर बंद हुआ।

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बीते सप्ताह सेंसेक्स के तेजी वाले शेयरों में प्रमुख रहे - इंफोसिस (1.83 फीसदी), हिन्दुस्तान यूनीलीवर (0.91 फीसदी), ओएनजीसी (1.28 फीसदी) और पॉवरग्रिड (0.43 फीसदी)।

वहीं, सेंसेक्स के गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे - एनटीपीसी (0.89 फीसदी), कोल इंडिया (3.71 फीसदी), टाटा मोटर्स (4.32 फीसदी) और हीरो मोटोकॉर्प (5.72 फीसदी)।

विदेशी वस्तु बाजार में, कच्चे तेल का फरवरी 2019 का सौदा 62 सेंट्स बढ़कर 52.78 डॉलर प्रति बैरल (एक बैरल करीब 159 लीटर के बराबर होता है) की दर से तय हुआ है।

आर्थिक मोर्चे पर, चालू वित्तवर्ष की अप्रैल से नवंबर की अवधि में देश का राजकोषीय घाटा पूरे साल के बजटीय लक्ष्य का 114.8 फीसदी हो गया है, जोकि कुल 7.17 लाख करोड़ रुपये है। इसका मुख्य कारण राजस्व की वृद्धि दर कम होना है। बजट में पूरे साल में कुल 6.24 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय घाटे का लक्ष्य रखा गया था।

महालेखा नियंत्रक (सीजीए) द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष के पहले आठ महीनों में राजकोषीय घाटा पूरे वित्त वर्ष के लक्ष्य का 112 फीसदी रहा था।

चालू वित्तवर्ष में नवंबर तक सरकार का कुल खर्च 16.13 लाख करोड़ रुपये (बजटीय अनुमान का 66.1 फीसदी) रहा, जबकि कुल प्राप्ति 8.97 लाख करोड़ रुपये (बजटीय अनुमान का 49.3 फीसदी) रहा, जबकि वित्तवर्ष 2017-18 में समान अवधि में कुल प्राप्ति बजटीय अनुमान का 54.2 फीसदी था।