वाशिंगटन : अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। सऊदी अरब के तेल पाइपलाइनों पर बीते सप्‍ताह हुए हमले के बाद इस तरह की आशंकाओं को और बल मिला, जो अमेरिका का करीबी है, जबकि ईरान के साथ उसकी मध्‍य-पूर्व एशिया में वर्चस्‍व की लड़ाई है। सऊदी अरब के तेल पाइपलाइनों पर हमले की जिम्‍मेदारी यमन के हूती व‍िद्रोहियों ने ली है, जिनका झुकाव ईरान की ओर है।

ईरान के साथ 2015 में हुए परमाणु समझौते से अमेरिका के पिछले साल बाहर होने और उस पर फिर से प्रतिबंध लगाने के बाद से ही दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। पिछले दिनों मध्‍य-पूर्व में अमेरिकी सेना की तैनाती में बढ़ोतरी के बाद क्षेत्र में संकट और गहरा गया है। इन सबके बीच अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है। उन्‍होंने चेतावनीभरे लहजे में कहा कि अगर ईरान जंग करता है तो उसे पूरी तरह से नष्‍ट कर दिया जाएगा।

ट्रंप ने इस संबंध में एक ट्वीट किया और कहा, 'यदि ईरान लड़ना चाहता है, तो यह ईरान का आधिकारिक अंत होगा। अमेरिका को फिर कभी धमकी मत देना।' अमेरिकी राष्‍ट्रपति की ओर से यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जबकि अमेरिका ने पहले ही खाड़ी में विमानवाहक पोत और बी-52 बमवर्षक तैनात किए हैं।

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अमेरिका ने जहां इसे 'ईरान से संभावित खतरों' से निपटने के लिए उठाया गया कदम बताया, वहीं ईरान ने अमेरिका के इस कदम को क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाला करार देते हुए कहा कि वह इसे बर्दाश्‍त नहीं करेगा।

दूसरी ओर सऊदी अरब के विदेश मामलों के राज्य मंत्री अदेल अल-जुबेर ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘सऊदी अरब क्षेत्र में युद्ध नहीं चाहता है और वह इसकी कोशिश नहीं कर रहा है... लेकिन, यदि अन्य पक्ष युद्ध चुनता है, तो सऊदी अरब पूरी ताकत और प्रतिबद्धता के साथ इसका मुकाबला करेगा और अपनी, अपने नागरिकों और अपने हितों की रक्षा करेगा।''

बगदाद में अमेरिकी दूतावास में रॉकेट गिरने की रिपोर्टों के बाद ट्रम्प ने ट्वीट किया, ‘‘यदि ईरान लड़ाई चाहता है तो यह ईरान का आधिकारिक अंत होगा। अमेरिका को फिर धमकी मत देना।''