जेनेवा : कश्मीर मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार मुंह की खाने के बाद भी पाकिस्तान सुधर नहीं रहा है। कश्मीर मुद्दे पर एक बार फिर पाकिस्तान दुनिया में अकेला पड़ गया है। पाकिस्तान की कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन के नाम पर यूएनएचआरसी में प्रस्ताव लाने की कोशिश नाकाम हो गई।

जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र के 42वें मानवाधिकार सेशन में पाकिस्तान को प्रस्ताव लाने के लिए पर्याप्त संख्या में अन्य देशों का समर्थन नहीं मिला है। जबकि भारत ने एक बार फिर इसे आंतरिक मामला बताया है। दुनियाभर के राजनीतिक मंच पर भारत ने यह बात साबित कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना वह उसका आंतरिक मामला है।

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा में 'कश्मीर मामले' को उठाने की प्रतिज्ञा लेते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि जम्मू एवं कश्मीर की विशेष स्थिति को बहाल करने तक भारत से बात करने का कोई फायदा नहीं है।

डॉन न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह बयान बुधवार को पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर इंटीग्रेटेड ट्रांसिट ट्रेड मैनेजमेंट सिस्टम का उद्घाटन करने के बाद मीडिया को दिया था।

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इमरान खान ने कहा कि "जब तक वे (नई दिल्ली सरकार) कश्मीर से कर्फ्यू नहीं हटा लेते और अनुच्छेद 370 दोबारा लागू नहीं कर देते, तब तक उनके (भारत) साथ बातचीत करने की कोई संभावना नहीं है।" उन्होंने कश्मीर जाकर लड़ने को इच्छा जताने वाले पाकिस्तानियों को भी चेतावनी दी।

इमरान खान ने कहा, "पाकिस्तान का कोई भी व्यक्ति अगर कश्मीर जाकर लड़ना चाहता है या कश्मीर में जिहाद के लिए जाना चाहता है, तो वह कश्मीरियों के साथ सबसे बड़ा अन्याय करेगा। इस तरह का कारनामा कश्मीरियों के प्रति दुश्मनी निभाने जैसा होगा।"