नई दिल्ली: पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम की 40 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं। 28 नवंबर को होने वाले मदतान के लिए राजनीतिक पार्टियां एड़ी चोटी का जोर लगा रही है। ईसाई बहुल राज्य होने के कारण हिंदुवादी संगठनों को यहां पांव जमाने में काफी मशक्कत करना पड़ रहा है।

इससे पहले चर्च और ईसाई मिशनरीज के पादरियों का बयान हिंदुवादी संगठनों को परेशान करता रहा है। हैरानी ये कि चुनाव के ऐन पहले सभी मिशनरियां और चर्च के पदाधिकारी किसी तरह की राजनीतिक टिप्पणी करने से बच रहे हैं। खासकर हिंदुवादी संगठनों के खिलाफ कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है। सियासी जानकारी मानते हैं कि भले सार्वजनिक तौर पर कोई कुछ न बोले, लेकिन धार्मिक छवि वाली पार्टियों के खिलाफ गोलबंदी की तैयारी है। जिससे खासकर बीजेपी को बड़े नुकसान की आशंका जताई जा सकती है।

बता दें कि मिजोरम की 87 फीसदी आबादी ईसाई है। ऐसे में बीजेपी के मंदिर का राग अलापने वाले यहां कम ही मिलेंगे। मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) के तौर पर सहयोगी होने के बावजूद बीजेपी अकेले ही मैदान में उतरी है।

चर्चों के तमाम संगठन बीजेपी के खिलाफ आग नहीं उगल रहे हैं। हालांकि भाजपा इसे अपने तरीके से आंकलन करती है। पार्टी नेताओं के मुताबिक अब ईसाई बहुल इलाकों में भी ये समझ पैदा होने लगी है कि 'सबका साथ सबका विकास' ही रास्ता है।

मिजोरम विस स्पीकर ने ज्वाइन की बीजेपी

ताजा घटनाक्रम में मिजोरम विधानसभा के स्पीकर हीफी ने अपने पद और कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। हिफी अब बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। जिससे फिलहाल प्रदेश बीजेपी का कॉन्फिडेंस बढ़ा है।

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पूर्वोत्तर में बीजेपी फिलहाल मजबूत स्थिति में मानी जा रही है। नॉर्थ ईस्ट के चार राज्यों में बीजेपी सत्ता में है। साथ ही बाकी दो राज्यों में बीजेपी की सरकार में भागीदारी है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष जे.वी.लूना के मुताबिक बीजेपी की छवि पहले काफी खराब थी। जिसमें अब सुधार हुआ है। पहले भाजपा को अछूत मानने वाले भी अब भगवा की तरफ झुक रहे हैं।

मिजोरम में बीजेपी का इतिहास काफी बुरा रहा है। इससे पहले भाजपा पांच बार यहां चुनाव लड़ने के बावजूद अपना खाता तक नहीं खोल सकी थी। इस बार पार्टी को काफी उम्मीदें हैं। खुद बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने यहां चुनाव प्रचार का शंखनाद किया। उन्होंने राजधानी में बीजेपी के भव्य दफ्तर का भी उद्घाटन भी किया।

भले चर्च से जुड़े संगठनों की रहस्यमयी चुप्पी बीजेपी नेताओं की परेशानी का सबब हो। बावजूद इसके प्रदेश नेताओं का दावा है कि राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल होने की गरज से लोग राष्ट्रवादी पार्टी यानी भारतीय जनता पार्टी को ही तरजीह देंगे। बीजेपी ने आरोप लगाया कि मिजोरम के लोग कांग्रेस व बाकी क्षेत्रीय पार्टियों के घोटालों से परेशान है।

वहीं राजनीतिक जानकार बीजेपी के इन दावों को खारिज करते हैं। उनके मुताबिक बीजेपी को राज्य में पैर जमाने में अभी और वक्त लगेगा। राज्य में कांग्रेस पार्टी और एमएनएफ ही दो धुरी हैं जिसे बहुसंख्यक आबादी पसंद करती है।

मिजोरम के मुख्यमंत्री ने केंद्र को लिखा खत

एक अन्य घटनाक्रम में मिजोरम के मुख्यमंत्री ललथनहवला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) एस बी शशांक को तत्काल हटाने की मांग की है। मुख्यमंत्री ललथनहवला के मुताबिक आम लोगों का भरोसा मुख्य निर्वाचन अधिकारी से खत्म हो चुका है। लिहाजा 28 नवंबर को होने वाले चुनाव को निष्पक्ष बनाने के लिए सीईओ को हटाना जरूरी है।

मिजोरम के मुख्यमंत्री ने इस बाबत चुनाव आयोग को शिकायत की है कि गृह मंत्रालय के प्रधान सचिव ललनुनमाविया चुआउंगो मिजोरम की चुनाव प्रक्रिया में अनुचित दखलअंदाजी कर रहे हैं।