टोक्यो : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने सोमवार को प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की, जिसमें दोनों नेताओं ने भारत-प्रशांत क्षेत्र के हालात समेत कई द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।

औपचारिक शिखर वार्ता से एक दिन पहले ही दोनों प्रधानमंत्रियों ने खूबसूरत प्रशासनिक प्रांत यामानाशी में माउंट फुजी के पास एक आलीशान रिसार्ट में करीब आठ घंटे साथ-साथ बिताये थे। इस दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों पर और द्विपक्षीय संबंध के रणनीतिक आयाम को और गहरा करने पर चर्चा हुई। शनिवार को जापान पहुंचे मोदी को प्रधानमंत्री आबे के सरकारी आवास कांतेई में पहुंचने पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

नई दिल्ली से रवाना होने से पहले मोदी ने भारत और जापान को ‘विजयी साझेदार' करार दिया और कहा कि जापान आर्थिक और प्रौद्योगिकी आधुनिकीकरण में नयी दिल्ली का सबसे विश्वस्त साझेदार है। मोदी प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार सितंबर 2014 में जापान गये थे। तब से आबे के साथ उनकी यह 12वीं मुलाकात है। औपचारिक शिखर वार्ता के दौरान मोदी रक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा समेत विभिन्न मुद्दों पर आबे के साथ बातचीत कर सकते हैं।

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द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा दोनों नेता विभिन्न क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श कर सकते हैं, जिनमें भारत-प्रशांत क्षेत्र के हालात शामिल हैं जहां चीन अपनी ताकत दिखा रहा है। कहा जाता है कि प्रधानमंत्री की यात्रा दोनों देशों के बीच दोस्ती के परपंरागत बंधन को दोहराएगी और विविध क्षेत्रों में बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करेगी।

भारत को मोदी की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना और जापान के कार्यक्रम एशिया हेल्थ एंड वेलबींग इनीशियेटिव के बीच किसी तरह के एकीकरण की भी उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल एंड डेडिकेटिड फ्राइट कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं हमारी आर्थिक साझेदारी के उच्च स्तर और मजबूती को दर्शाती हैं।