नवग्रहों में सबसे प्रभावी है शनि और जब भी शनिदेव का नाम आता है तो इनसे सब भयभीत हो जाते हैं। ज्योतिष में शनि की अहम भूमिका है क्योंकि बारह राशियों में शनि एक साथ आठ राशियों को प्रभावित करते हैं।

देखा जाए तो सौरमंडल में शोभनीय और नीली आभा लिए सबसे सुंदर ग्रह है शनि। ज्ञात हो कि शनि तीन राशियों को अपनी दृष्टि से, तीन राशियों को साढ़ेसाती के रूप में और दो राशियों को ढैया के रूप में प्रभावित करते हैं।

नवग्रहों में शनि को न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है। शनि दुख के स्वामी भी हैं। शुभ होने पर व्यक्ति सुखी और अशुभ होने पर सदैव दुखी व चिंतित रहता है। जिस प्रकार एक शिक्षक हमारी ऊर्जाओं को समझकर हमें सही मार्ग पर ले जाने की कोशिश करता है और गलत करने पर दंडित भी करता है, उसी प्रकार शनि भी अनुशासन में रहकर हमें सीमाओं से बांधता है।

इस वर्ष जल्द ही शनि का राशि परिवर्तन होने वाला है जिसका असर बारह राशियों पर पड़ेगा जहां कुछ राशियों के लिए यह ठीक रहेगा वहीं कुछ राशियों को सावधान भी रहना पड़ सकता है क्योंकि उन पर शनि का प्रकोप होगा।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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इसी सप्ताह माघी अमावस्या को दोपहर के बाद शनि का मकर में प्रवेश होगा। जहां शनि शुभ होने पर अपनी साढ़ेसाती और ढैया में जातक को आशातीत लाभ प्रदान करते हैं, वहीं अशुभ होने पर शनि इस समयावधि में जातक को घोर व असहनीय कष्ट प्रदान करते हैं।

शनि मंद गति से चलने वाला ग्रह है। शनिदेव एक राशि में दो वर्ष छह मास तक विराजमान रहते हैं। 24 जनवरी, 2020 (शुक्रवार) यानी माघी अमावस्या को दोपहर बाद शनि अपनी ही राशि मकर में प्रवेश करेंगे। इस क्षण के उपलक्ष्य में हर जगह शनि मंदिरों में शनि उत्सव होगा।

इन राशियों पर पड़ेगा असर

शनि के राशि परिवर्तन से जहां एक ओर वृषभ तथा कन्या राशि पर शनि की ढैया समाप्त होगी, वहीं दूसरी तरफ मिथुन एवं तुला राशि पर शनि की ढैया आरंभ होगी। इसी प्रकार शनि की साढ़ेसाती वृश्चिक राशि पर समाप्त होगी और कुंभ राशि को शनि की साढ़ेसाती लगेगी, जो सात वर्ष छह माह तक चलेगी।

धनु व मकर राशियां पहले से ही शनि की साढ़ेसाती से प्रभावित हैं। गोचर अनुसार शनि जब जातक की चंद्र राशि से एक भाव पहले भ्रमण करना शुरू करते हैं, तब जातक की शनि की साढ़ेसाती का आरंभ होता है।

इन राशियों पर रहेगा शनि का प्रकोप

साढ़ेसाती का अर्थ है- साढ़े सात साल अर्थात जातक की जन्मराशि से एक भाव पहले, जन्म/चंद्र राशि पर और जन्म/चंद्र राशि से एक भाव आगे तक के शनि के भ्रमण में पूरे साढ़े सात साल का समय लगता है क्योंकि शनि एक राशि में ढाई साल तक रहते हैं। इसी प्रकार जब शनि जन्म/चंद्र राशि से चतुर्थ या अष्टम भाव में होते हैं, तब शनि की ढैया प्रारंभ हो जाती है, जिसकी अवधि दो वर्ष छह माह अर्थात ढाई साल की होती है।

इस समय मिथुन, तुला, धनु, मकर व कुंभ राशियों पर शनिदेव का विशेष प्रभाव रहेगा। अत: इन राशियों के जातकों पर शनि का प्रकोप रहेगा।

व्यक्ति के जीवन में तीन बार ढैया और दो बार आती है साढ़ेसाती

शनि व्यक्ति के जीवन में तीन बार ढैया तथा दो बार साढ़ेसाती के रूप में अवश्य ही आते हैं। वैसे यह जातक का सबसे मुश्किल समय होता है परंतु यदि वह परोपकारी और मेहनती हो तो यही समय उसके जीवन का श्रेष्ठ काल बन जाता है और इसका प्रभाव उसके समस्त जीवनकाल तक बना रहता है।

सोशल मीडिया के सौजन्य से 
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जिन राशियों और जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का आरंभिक दौर है, उनकी राशि से बारहवें भाव में शनि स्थित होंगे। इस स्थिति में आर्थिक हानि, छुपे हुए शत्रुओं से नुकसान, बेमतलब की यात्रा और विवाद होते हैं।

कुछ ऐसा होगा शनि के गोचर का प्रभाव

- सहकर्मियों से संबंध अच्छे नहीं रहेंगे और वे आपके कर्मक्षेत्र में बाधाएं खड़ी कर सकते हैं।

- घरेलू मामलों में भी आपको चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिसके चलते आप तनाव महसूस करेंगे।

- आपको अपने खर्चों पर नियंत्रण रखना होगा। इस समय दूर की यात्रा फलदायी नहीं रहेगी।

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- शनि का स्वभाव ही विलंब और तनाव पैदा करने वाला है, हालांकि अंतत: आपको परिणाम जरूर मिलेगा। इसलिए धैर्य रखें और सही समय का इंतजार करें। इस अवधि में शनि सोच को प्रभावित करते हैं। अत: कोई फैसला जल्दबाजी में न लें।