आज भारतीय वैज्ञानिक विक्रम साराभाई की जन्म शत (जयंती) है। विक्रम अंबालाल साराभाई का जन्म 12 अगस्त 1919 को अहमदाबाद में हुआ था। अहमदाबाद में जन्में विक्रम साराभाई ने भारत को अंतरिक्ष तक पहुंचाया। आज पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी उनकी याद में अनेक कार्यक्रम मनाये जा रहे हैं। साराभाई को भारत के स्पेस प्रोग्राम का जनक माना जाता है। उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना की थी।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने डॉ विक्रम साराभाई को याद करते हुए ट्वीट किया, "डॉ विक्रम साराभाई की जन्म शती पर उन्हें सादर नमन। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक और भारतीय विज्ञान के पुरोधा डॉ साराभाई ने विविध क्षेत्रों में संस्थाओं का निर्माण किया और वैज्ञानिकों की कई पीढ़ियों का मार्गदर्शन किया। देश उनकी सेवाओं को हमेशा याद रखेगा।"

शिवराज सिंह चौहान

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी डॉ विक्रम साराभाई को याद करते हुए ट्वीट किया, "भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो की स्थापना कर भारतीय स्पेस प्रोग्राम को नई ऊंचाई पर ले जाने वाले महान वैज्ञानिक स्व विक्रम साराभाई की जयंती पर नमन। आपकी दीर्घदृष्टि से ही भारत आज अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक के बाद एक सफलताए प्राप्त कर नए आयाम गढ़ रहा है।"

विक्रम साराभाई और अब्‍दुल कलाम

डॉ साराभाई अपने दौर के उन गिने-चुने वैज्ञानिकों में से एक थे जो अपने साथ काम करने वाले वैज्ञानिकों और खासकर युवा वैज्ञानिकों को आगे बढ़ने में मदद करते थे। विक्रम ने डॉ अब्दुल कलाम के कॅरियर के शुरुआती चरण में उनकी प्रतिभाओं को निखारने में अहम भूमिका निभाई। डॉ कलाम ने खुद कहा था कि वह तो उस फील्ड में नवागंतुक थे। डॉ साराभाई ने ही उनमें खूब दिलचस्पी ली और उनकी प्रतिभा को निखारा।

बधाई संदेश

झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ट्वीट किया, "भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ विक्रम साराभाई की जयंती पर शत-शत नमन।" बीजेपी के नेता कैलाश विजयवर्गीय ने ट्वीट किया, "अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थान दिलाने के साथ-साथ आणविक ऊर्जा, इलेक्ट्रानिक्स और अन्य क्षेत्रों में भी अहम योगदान देने वाले पद्मभूषण श्री विक्रम साराभाई जी की जयंती पर सादर नमन।" इसके अलावा साराभाई को उनकी शत जंयती पर गूगल ने खास डूडल बनाकर याद किया।

बीजेपी के नेता डॉ दिनेश शर्मा ने ट्वीट किया, "शिक्षाविद एवं कला पारखी के साथ-साथ अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को अंतरराष्ट्रीय जगत पर सम्मान दिलाने वाले महान अंतरिक्ष वैज्ञानिक पद्मविभूषण डॉ विक्रम साराभाई जी की जयंती पर शत् शत् नमन।"

फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी

विक्रम साराभाई ने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट हासिल करने से पहले गुजरात कॉलेज में पढ़ाई की। इसके बाद अहमदाबाद में ही उन्होंने फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (पीआरएल) की स्थापना की। इस समय उनकी उम्र महज 28 साल थी।

आजादी आंदोलन

फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी की सफल स्थापना के बाद की डॉ साराभाई ने कई संस्थानों की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया। तकनीकी समाधानों के अलावा इनका और इनके परिवार ने आजादी की लड़ाई में भी भरपूर योगदान दिया।

परमाणु उर्जा आयोग के चेयरमैन रहने के साथ-साथ साराभाई ने अहमदाबाद के उद्योगपतियों की मदद से आइआइएम अहमदाबाद की भी स्थापना की। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में भी इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। सेटेलाईट इंस्ट्रक्शनल टेलीवीजन एक्सपेरिमेंट के लांच में भी साराभाई ने अहम भूमिका निभाई।

रॉकेट लाँचिंग

भारत के परमाणु विज्ञान कार्यक्रम का जनक डॉ होमी भाभा ने भारत में पहला रॉकेट लाँचिंग स्टेशन स्थापित करने में विक्रम साराभाई का समर्थन किया। पहली उड़ान 21 नवंबर 1963 को सोडियम वाष्प पेलोड के साथ लाँच की गई थी।

देश का पहला सेटेलाईट लांच

देश के पहले सेटेलाईट आर्यभट्ट को भी लाँच करने में विक्रम की अहम भूमिका रही। ‘नेहरू विकास संस्थान’ के माध्यम से उन्होंने गुजरात के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह देश-विदेश की अनेक विज्ञान और शोध सम्बन्धी संस्थाओं के अध्यक्ष और सदस्य थे।

पुरस्कार

विक्रम साराभाई को साल 1962 में शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार मिला। इसके अलावा साल 1966 में पद्म भूषण और 1972 में पद्म विभूषण (मरणोपरांत) से सम्मानित किया गया। साल 1971 में महज 52 साल की उम्र में उनका निधन हो गया।