आदिलाबाद : जिले के सरकारी कॉलेजों में नियमित प्राध्यापकों की कमी समस्या बनकर उभर रही है। पिछले कई वर्षों से कनिष्ठ प्राध्यापक पदों पर भर्ती नहीं की गई। साथ ही ठेकेदार प्रणाली पर नियुक्त प्राध्यापकों की कमी हो रही है। इससे गुणवत्तापरक शिक्षा नहीं मिल रही है। इसका असर छात्रों के भविष्य पर हो रहा है। सरकारी कॉलेजों में छात्रों की संख्या जहां एक ओर बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर नियमित फैकल्टी में प्राध्यापकों की नियुक्तियां नहीं हो रही है।

तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के 13 सरकारी कॉलेजों में केवल 13 नियमित प्राध्यापक हैं। इससे हम यह अंदाज लगा सकते हैं कि कॉलेज, छात्र, अध्यापन और अध्ययन की क्या स्थिति है। इन कॉलेजों में कोई लाइब्रेरियन नहीं है। इन पदों पर भर्तियां नहीं की गई है। इसके अलावा कॉलेजों में फिजीकल ट्रेनर नहीं हैं, जिससे छात्र खेलकूद से कोसों दूर रह रहे हैं।

कॉलेजों की स्थिति

आदिलाबाद जिले में 13 सरकारी कॉलेज हैं। इनमें 13 नियमित प्राध्यापक हैं। 138 ठेकेदार प्रणाली पर नियुक्त प्राध्यापक औ 59 पार्ट टाइम प्राध्यापक हैं। वर्ष 2012 से जूनियर प्राध्यापकों के पदों पर भर्ती नहीं की गई। वर्ष 2014 में इंटरमीडिएट बोर्ड के अध्यापकों को 10 प्रतिशत कोटे के अंतर्गत केवल कुछ पदों पर पदोन्नत किया गया। लगभग सात वर्ष से जूनियर प्राध्यापकों के पदों पर भर्ती नहीं होने से सरकारी कॉलेजों में शिक्षा के गुणवत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

सरकारी कॉलेजों में प्राध्यापकों की कमी असर पर इंटर परिक्षा परिणामों पर पड़ता है। आदिलाबाद जिले के आदिलाबाद और बेला में केवल मराठी माध्यम हैं। कॉलेज के छात्र अंग्रेजी माध्यम की प्रतीक्षा कर रहे हैं। सरकारी कॉलेजों में अंग्रेजी माध्यम की कमी है। इसलिए निजी कॉलेजों में छात्रों की संख्या बढ़ रही है। इंटर बोर्ड ने सुझाव दिया था कि पिछले वर्ष से जूनियर कॉलेजों में अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाया जाए, लेकिन नियमित प्राध्यापक नहीं है, इसलिए तेलुगु माध्यम में अध्यापन और अध्ययन चल रहा है।

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सरकारी कॉलेजों में नहीं है फिजीकल टीचर और लाइब्रेरियन

आदिलाबाद जिले के किसी भी सरकारी कॉलेज में एक फिजीकल टीचर और एक भी लाइब्रेरियन नहीं है। व्यायाम प्राध्यापकों के नहीं होने से छात्र को लिए खेल का मैदान गायब है, जिससे उनके शारीरिक फिटनेस में कमी है। इससे छात्र प्रतियोगिता परिक्षाओं में सफलता प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। लाइब्रेरी में किताबें नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित हो रही है।