दुनिया की स्थिति समय समय पर बदल रही है। आधुनिक तकनीकी के कारण दुनिया मुट्ठी में आ गई है। विज्ञान ने हमारा काम आसान कर दिया है। विज्ञान हमें आसमान लांघ कर चांद तक पहुंचा चुका है।

विज्ञान के कारनामों ने हैरान करना नहीं छोड़ा है। अरबपति बिजनेसमैन अब अंतरिक्ष में फैक्ट्रियां लगाने की सोच रहे हैं। इस पर गंभीरता से काम चल रहा है। यह सुनने में अचंभा होता है। एक मैग्जिन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अंतरिक्ष में फैक्ट्रियां लगाने पर तर्क दिये जा रहे हैं। बढ़ती आबादी के दबाव को कम करने के लिए संसाधनों का सीमित इस्तेमाल करने की जरूरत है।

कॉन्सेप्ट फोटो
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वैज्ञानिकों का कहना है कि इंसानों के अस्तित्व के लिए बहुत कम संसाधन बचे हैं। इंसानों को धरती के बाहर कदम रखना होगा और दूसरे ग्रहों और एस्टोरॉइड के संसाधनों का इस्तेमाल करना होगा। अंतरिक्ष वैज्ञानिक इस दिशा में काम करना शुरू कर चुके हैं।

नासा के जरिए कैलिफोर्निया की एक स्टार्टअप कंपनी हायब्रिड मेटल मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम को डेवलप करने का काम कर रही है। इससे अंतरिक्ष के ग्रहों और शुद्र ग्रहों पर मौजूद टाइटेनियम और अल्यूमिनियम जैसे धातुओं का 3डी प्रिंट तैयार किया जा सकता है।

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अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का कहना है कि अंतरिक्ष में इंडस्ट्रीज को सोलर सिस्टम से धरती से कई गुना ज्यादा उपयोग होगा। मनुष्य को अब धरती के बाहर कदम रखना जरूरी हो गया है। दूसरे ग्रहों के संसाधनों का उपयोग संभव है।

एस्टोरॉइड माइनिंग तकनीकी का विकास करने के लिए अरबों रुपये खर्च किये जा रहे हैं। अंतरिक्ष में फैक्ट्रियां लगाने के मिशन को कई अरबपति फंड कर रहे हैं। इनमें एमेजॉन के सीईओ जेफ बेजोस का नाम शामिल है। एक मैग्जिन से बात करते हुए उन्होंने कहा है कि धरती को बचाने के लिए हमें अंतरिक्ष का रुख करना होगा। पिछले महीने चेफ बेजोस ने अवकाश कंपनी लुनर लैंडर का ऐलान किया था।

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बहरहाल, अंतरिक्ष में फैक्ट्री लगाने की सोच अभी शुरूआती दौर में है।